नई दिल्ली: ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरु की बनाई एक पेंटिंग 4.14 करोड़ रुपये में बिकी. पेंटिंग का नाम है ‘टू लिव टोटली!’ और ये 5 फीट लंबे-चौड़े कैनवास पर उकेरी गई है. खास बात ये है कि इस पेंटिंग में पृथ्वी पर जीवन को उकेरा गया है. पेंटिंग से जुटाए 4.14 करोड़ रुपये ईशा योग केंद्र के आसपास ग्रामीण तमिलनाडु में ईशा के महामारी राहत प्रयासों में खर्च किए जाएंगे. Also Read - पीएम मोदी ने सीएए के समर्थन में आध्यात्मिक गुरु जग्‍गी वसुदेव का वीडियो क‍िया पोस्ट

बता दें कि सद्गुरु ने हाल ही में एक सत्संग में घोषणा की कि “जो भी “बीट द वायरस फंड” (#BeattheVirus) के लिए अधिकतम राशि का दान करेगा, उसे यह पेंटिंग मिलेगी.” उन्होंने ये भी कहा था कि “पेंटिंग की छोटी प्रतियां” भी खरीदारों के लिए उपलब्ध होंगी. “बीट द वायरस फंड” को कोयंबटूर के थोंड़ामुथूर ब्लॉक के गांवों में कोरोना वायरस के प्रवेश को रोकने के लिए बनाया गया है. इस ब्लॉक में 2 लाख से अधिक लोग निवासी करते हैं. Also Read - रणवीर सिंह के बाद अब कंगना रनौत करेंगी सदगुरु से मुलाकात, जिंदगी का रहस्य जानना चाहती हैं!

इस इलाके में हर दिन, लगभग 700 ईशा स्वयंसेवकों का एक कार्यबल गाँवों में एक इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक निलेवम्बु कशायम (Nilavembu Kashayam) के साथ-साथ विकेन्द्रीकृत रसोई में तैयार किए गए ताजा पका हुआ भोजन वितरित करता है. दैनिक पोषण के अलावा, वालंटियर्स जागरूकता बढ़ाने, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, और अग्रिम कर्मियों और प्रथम उत्तरदाता को सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करने में प्रशासन की सहायता कर रहे हैं. Also Read - Blood Moon 2018: चंद्रग्रहण को लेकर भारत समेत पूरी दुनिया से जुड़े हैं ये मिथक, पढ़ें पूरी जानकारी

पूलुवापट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्थानीय प्रशासन द्वारा एक स्टैंडबाय आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया गया है. ईशा मेडिकल बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक चीजों के साथ वार्ड का समर्थन कर रही है.

गौरतलब है कि महामारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है और गांवों में लाखों लोगों की आजीविका चली गई है. ऐसे में ईशा की महामारी राहत गतिविधियां समाज में भुखमरी रोकने की ओर केंद्रित हैं. अधिकतर ग्रामीण आबादी रोजाना की कमाई पर निर्भर है, और महामारी को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन से वे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.

सदगुरू ने कहा, “हालांकि सरकार और प्रशासन समाज के सबसे गरीब लोगों तक पहुँचने के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं, फिर भी कई दरारें पड़ेंगी. इसलिए यह सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि कोई भी भुखमरी की कगार पर न पहुंचे.”