School In Coronavirus: कोरोना संक्रमण ने बहुत सारे तौर-तरीके बदले हैं, इसमें शिक्षा भी शामिल है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का अर्जुनपुर गढ़ प्राथमिक विद्यालय अपने जिले के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है. यहां कोरोना संकट के दौरान भी जागरुकता की पाठशाला चलती रही है. ऐसा करने वाले इसी प्राथमिक विद्यालय के पूर्व छात्र और प्रधानाचार्य देवब्रत त्रिपाठी हैं, जिन्होंने पूरा जीवन इस स्कूल को सजाने और संवारने में लगा दिया है. Also Read - Corona Warriors: 50 साल की नर्स मुमताज बेगम किडनी की मरीज, हुआ था कोरोना, ठीक हो फिर काम पर लौटीं...

त्रिपाठी की 38 साल की कड़ी मेहनत के चलते ही कभी जर्जर भवन रहा ये स्कूल एक खूबसूरत बिल्डिंग के रूप में चमचमा रहा है. इसके परिसर में फलदार और खूबसूरत पेड़ों की बगिया लहलहा रही है. मैदान में लगी मखमली घास स्कूल की खूबसूरती में चार चांद लगा रही है. Also Read - बिहार चुनाव पर संजय राउत का सवाल, क्या अब कोरोना वायरस की महमारी समाप्त हो गई?

वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान प्रधानाचार्य देवब्रत ने विद्यालय की दहलीज के बाहर जाकर अगल-बगल के गांवों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए पाठशाला चलाई. इतना ही नहीं लोगों को संक्रमण से बचने के लिए शारीरिक दूरी का पाठ पढ़ाया, मास्क व सैनिटाइजर बांटे. Also Read - Covid 19 Update: देश में संक्रमितों की संख्या पहुंची 58 लाख के पार, 92 हजार से अधिक लोगों की मौत

शैक्षणिक वतावरण को दुरूस्त रखने में विद्यालय के शिक्षकों का भरपूर सहयोग मिला. उनकी शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना ने उन्हें इस बार का राज्य पुरस्कार का हकदार भी बना दिया. यह पुरस्कार उन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री के हाथों दिया गया.

यमुना के कछार के प्राथमिक विद्यालय में बतौर प्रधानाध्यापक तैनात देवब्रत इसी विद्यालय के पूर्व छात्र हैं. स्कूल के प्रति लगाव के चलते वे 1982 से ही इसे सजाने और संवारने में लगे हैं.

कोरोना काल में जहां सभी स्कूल-कॉलेज बंद चल रहे हैं। संक्रमण के डर से बच्चे नहीं आ रहे हैं. वहीं अर्जुनपुर के विद्यालय में जागरूकता की पाठशाला चल रही है. कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए न केवल लोगों को जागरूक किया जा रहा था, बल्कि यहां के अध्यापक आस-पास के व्यक्तियों को बुलाकर उन्हें हाथ धोने और स्वच्छता का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है.
(एजेंसी से इनपुट)