अब वो दिन गए जब आपको अंग के ट्रांसप्लांट के लिए किसी और के भरोसे बैठना पड़ता था। अब ऐसी तकनीक आ गयी है जिसके इतेमाल से आपको इंसान की अंग की कोई जरूररत नहीं पड़ेगी। जी हां सही सुन रहे है आप, अब इंसान के शरीर में लगेगा सुउर का अंग। चलिए आपको बतातें है आखिर कैसे की जाएगी इंसान के शरीर में सुअर के अंग को फिट। यह भीं पढ़ें: OMG! 5 साल नालोंं में छुपकर एक शख्स लड़कियों के स्कर्ट की तस्वीरें लेता रहा 

आज कल के दौर में लोगों की किडनी, हार्ट और लीवर में बीमारी होना आम बात हो गया है। कभी-कभी ऐसा भी होता है जब यह अंग काम करना बंद कर देतें है और फिर खुद को सवस्थ रखने के लिए इंसान को जरुरत पड़ती है एक नए अंग की जिसके लिए एक भारी कीमत चुकानी पड़ती है। भारी कीमत चुकाने के बावजूद अंग नहीं मिलते है जिसके कारण हर साल कई लोगो की मौत हो जाती है।

इस नई वैज्ञानिक तकनीक को क्रिस्पर कहते है। पॉर्काइन एंडोजिनस रेट्रोवायरस नाम के वायरस के असर को कम करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह वायरस इंसानों में संक्रमण पैदा कर सकता है। वही इस प्रक्रिया को जीनोट्रांसप्लांटेशन कहते हैं और यह अंग ट्रांस्प्लांट से जुड़ी कई परेशानियों का हल साबित होगा।

बीबीसी की खबर के मुताबिक शोधकर्ता पहले सुअर मेसे उन कमियों को दूर करने में लगे है जो उनके डीएनए में मौजूद है। इंफेक्शन को दूर करने क प्रयास जारी हैं जिसमे कामयाबी मिलकने से ही इंसानो में अंगों के ट्रांसप्लांट में मदद मिलेगी। सुनने में आरहा है की इस में और कुछ साल लगेंगे, बताया यह जा रहा है की काफी समय से वैज्ञानिक सुअरों के टिशू में बदलाव करने की मुसीबत से जूझ रहे हैं। आने वाले वक़्त में यह उम्मीद की जा रही है की यह प्रयोग हो सफल।