सम्भल (उत्तर प्रदेश): दिल्ली के करीब 10 स्टूडेंट्स घूमने निकले. इसी दौरान अचानक लॉकडाउन का ऐलान हो गया और ये स्टूडेंट्स जहां थे वहीं फंस गए. जिस गांव में हैं, इन्हें वहां खेतों में गेंहू तक काटने पड़ रहे हैं. ऐसा रुपए कमाने के लिए किया ताकि जिनके घर रुके हैं उन पर ज्यादा बोझ न पड़े. इनमें लड़कियां भी शामिल हैं. जब दिल्ली वापसी का कोई रास्ता नहीं दिखा. कहीं से मदद नहीं मिली तो उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है. लड़कियों का कहना है कि हम परेशान हो गए हैं. हमें किसी भी तरह से घर पहुंचना है. Also Read - ब्रिटेन में पीएम के मुख्‍य सलाहकार ने किया था लॉकडाउन का उल्लंघन, उप मंत्री ने दिया इस्तीफा

ये बच्चे उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले के चंदौसी में हैं. कोविड-19 लॉकडाउन के कारण सभी छात्र पिछले करीब 40 दिन से चंदौसी में एक मकान में फंसे हुए हैं. उन्होंने दिल्ली, अपने घर वापसी के लिए अधिकारियों से मदद मांगी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. दिल्ली से आई छात्रा शीतल कश्यप ने बताया कि परीक्षाएं खत्म होने के बाद 23 मार्च को अपने साथ पढ़ने वाले कुछ छात्रों के साथ वह गढ़मुक्तेश्वर घूमने आयी थीं. उन्होंने बताया कि गढ़मुक्तेश्वर पहुंचने पर पता लगा कि दिल्ली में धारा 144 लागू कर दी गई है और किसी को वहां जाने की इजाजत नहीं है. Also Read - कोरोना मामले पर स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान- प्रतिबंधों में ढील के कारण 5 राज्यों में बढ़ें संक्रमण के मामले

शीतल ने बताया कि उन्होंने घबराकर अपने माता—पिता से बात की तो उन्होंने हमें चंदौसी तहसील के असालतपुर जारई गांव में अपने रिश्ते के मामा भगवान दास के यहां जाने को कहा. शीतल ने बताया कि वहां पहुंचने पर लॉकडाउन घोषित हो गया. छात्रा ने कहा, ‘‘दिल्ली वापसी के लिए चंदौसी के उपजिलाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 14 अप्रैल तक है और अभी कुछ नहीं हो सकता. फिर 14 अप्रैल को बात करने पर उन्होंने कहा कि अभी भी दिल्ली जाना संभव नहीं है.’’ Also Read - यूपी में Coronavirus के संक्रमितों का आंकड़ा 6548 हुआ, अब तक 170 लोगों की मौत

शीतल ने बताया कि हमारे पास जो पैसे थे वो भी ख़त्म हो गए, फिर हमने कुछ समय खेत में गेंहू काटकर 150-200 रुपए कमाए ताकि गरीब मामा पर ज्यादा बोझ ना पड़े. उन्होंने बताया कि एक मई को प्रशासन के एक और आला अफसर से बात हुई लेकिन उन्होंने भी हमें दिल्ली भेजने के लिए कोई संजोषजनक उत्तर नहीं दिया. शीतल के साथ-साथ उनकी सहपाठी श्रुति तथा अन्य छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे पिछले 40-45 दिनों से चंदौसी में फंसे हुए हैं, उनके पास भोजन के लिये भी पैसे नहीं हैं, कृपया उन्हें घर पहुंचवा दें.

इस बीच, चंदौसी के उपजिलाधिकारी महेश चन्द्र दीक्षित ने बताया कि छात्रों से उनकी से एक—दो बार बात हुई थी. उन्होंने उनसे कहा कि उनके पास सिर्फ जिले में ही आवागमन का पास देने का अधिकार है, वे इस मामले में अपर जिलाधिकारी के पास ऑनलाइन आवेदन करें, अगर कोई दिक्कत हो तो सबका चंदौसी रहने का इंतजाम कर दिया जाएगा, मगर छात्रों ने कहा कि वे दिल्ली ही जाना चाहते हैं. वहीं, जिला अधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह इस मामले के बारे में पता करेंगे.