नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं, और देश के प्रधानमंत्री हैं. इन पदों पर रहने से पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी कई पदों पर रहे हैं. इन पदों पर रहते हुए और खासकर प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी अद्भुत प्रशासकीय क्षमता लोगों ने देखी है. ऐसे में उनकी नेतृत्व-क्षमता और व्यक्तित्व के कई ऐसे पहलू हैं, जिसके बारे में विस्तार से जानने की जिज्ञासा कई लोगों को होगी. गुजरात के एक रिसर्च स्कॉलर ने भी इसी जिज्ञासा के तहत नरेंद्र मोदी को करीब से जानने की कोशिश की और पीएम मोदी पर डॉक्टरेट कर लिया. चौंकाने वाली बात यह है कि इस स्कॉलर का नाम मेहुल चोकसी है. नाम से कंफ्यूज मत होइएगा, यह वह हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी नहीं है, जो पंजाब नेशनल बैंक के 13 हजार करोड़ से ज्यादा रुपए हजम कर जाने वाले नीरव मोदी के साथ भारत से भागा हुआ है. यह मेहुल चोकसी हीरा-नगरी सूरत का रहने वाला है और पेशे से वकील है. इसी मेहुल चोकसी ने पीएम मोदी के ऊपर लिखी अपनी PhD थीसिस हाल ही में जमा की है.

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सूरत के वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री लेने वाले मेहुल चोकसी की PhD का विषय था- Leadership under Government – Case Study of Narendra Modi. मेहुल चोकसी ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि अपनी थीसिस के लिए उसने बहुत मेहनत की है. उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी पर पीएचडी करने में 8 साल से ज्यादा का वक्त लगा. उसने वर्ष 2010 में अपने शोध कार्य की शुरुआत की थी. इस दौरान नरेंद्र मोदी के बारे में लोगों के विचार जानने के लिए उसने सर्वेक्षण किया. साथ ही 450 से ज्यादा सरकारी अफसरों, किसानों, विद्यार्थियों और राजनेताओं के साक्षात्कार लिए. सर्वेक्षण और साक्षात्कार के दौरान मेहुल चोकसी ने नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता के बारे में लोगों के विचार जाने. उनके अनुभव सुने और उसे अपने शोध का हिस्सा बनाया.

मीडिया के साथ बातचीत में मेहुल चोकसी ने बताया कि सर्वेक्षण करने के लिए 32 प्रश्नों की एक प्रश्नावली (Questionnaire) बनाई थी. शोध में शामिल सभी 450 लोगों से मेहुल ने यह प्रश्नावली भरवाई. मेहुल ने बताया कि इस दौरान उन्होंने पाया कि 25 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी की भाषण-कला को सबसे ज्यादा असरदार मानते हैं. वहीं, 48 प्रतिशत लोगों का मानना था कि नरेंद्र मोदी की पॉलिटिकल मार्केटिंग बेजोड़ है. वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के आर्ट्स विभाग के नीलेश जोशी के मार्गदर्शन में पीएचडी करने वाले मेहुल चोकसी ने बताया कि 2010 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से उसने यह शोधकार्य शुरू किया था. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता को लेकर अधिकतर लोग पॉजिटिव सोच रखते हैं. मेहुल के सर्वे में 51 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता को लेकर पॉजीटिव फीडबैक दिए, वहीं सर्वे में 34.25 प्रतिशत लोगों ने इस प्रश्न पर निगेटिव जवाब दिया.

मेहुल चोकसी के शोधकार्य के मार्गदर्शक नीलेश जोशी ने पीएचडी के इस विषय का चुनाव करने को लेकर बताया कि राजनीति में उच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति के ऊपर शोधकार्य करना आसान नहीं होता. इसमें कई चुनौतियां होती हैं. लेकिन इस शोध का विषय इतना रोचक था कि हम लोगों ने इसे पूरा करने का मन बनाया. जोशी ने कहा कि राजनीति के शिखर पर बैठे किसी व्यक्ति के बारे में सूचनाएं जुटाना, लोगों के विचार जानना, बिना किसी पूर्वाग्रह के शोध करना बहुत कठिन होता है. खासकर, ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में विभिन्न विभागों के अधिकारियों या आम जनता से उनके विचार जानना तो और भी कठिन है. बावजूद इसके मेहुल चोकसी ने अपनी पीएचडी पूरी की, यह अच्छी बात है.