Taj Mahal: खूबसूरती के लिए विख्यात आगरा के ताजमहल का नजारा इन दिनों बदला हुआ है. लोगों को ये काफी पसंद आ रहा है. Also Read - Taj Mahal Re-Opens: पर्यटकों के लिए छह महीने बाद खुला Taj Mahal, जानें का कर रहे हैं प्लान तो पहले पढ़ लें ये जरूरी बदलाव..

दरअसल, ताजमहल के पीछे का नजारा इन दिनों बेहद खूबसूरत दिख रहा है. नहरनुमा यमुना नदी में आमतौर पर पानी काफी कम रहता है, मगर लगातार हुई बारिश ने उसका जलस्तर बढ़ा दिया है. यमुना के भर जाने पर इन दिनों मेहताब बाग से एक शानदार दृश्य नजर आ रहा है. Also Read - बड़ा हादसा: यमुना में नहाने गई युवती के साथ पांच लोग डूब गए, चार शव बरामद, मचा कोहराम

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बदले हुए इस माहौल ने यहां के लोगों को खासा उत्साहित कर दिया है. यमुना किनारा रोड के एक मंदिर के पुजारी नंदन श्रोत्रिय कहते हैं, “मानसून की बारिश ने नदी के किनारों को साफ और हरा-भरा कर दिया है. वहीं कुछ समय के लिए रुकी लोगों की आवाजाही ने यहां पक्षियों की चहचहाट भी वापस ला दी है.”

नदी के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता श्रवण कुमार सिंह कहते हैं, “बादशाह शाहजहां ने यमुना नदी के कारण इस जगह को ताजमहल के निर्माण के लिए चुना था लेकिन पिछले कुछ दशकों से साल के ज्यादातर समय में यह नदी एक गंदी नहर जैसी हालत में रहती है.”

ऐसे में सवाल यह है कि अभी नदी पानी से भरी है, लेकिन कब तक इसमें पानी रहेगा? इस पर पर्यावरणविद् देवाशीष भट्टाचार्य कहते हैं, “साल में लगभग आठ महीने यमुना सूखी और प्रदूषित रहती है, क्योंकि नदी पर बने बांध हथिनी कुंड से वजीराबाद, ओखला और गोकुल तक पानी का बहाव रोक देते हैं. लिहाजा, शहर के निचले हिस्सों में पानी की कमी हो जाती है. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नदी में सालभर पानी रहे, ताकि इसमें जलीय जीवन बना रहे.”

यह यमुना नदी की भव्यता ही थी जिसने 500 साल पहले, मुगल वंश के संस्थापकों को यहां आकर दुकानें खोलने के लिए आकर्षित किया था और फिर उनके वंशजों को ताजमहल जैसी कृति समेत कई स्मारक बनाने के लिए प्रेरित किया.

लेकिन बदबूदार हो चुकी इस नदी से अब लोग दूर ही भागते हैं. जबकि कभी नदी का यही किनारा संपन्न व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था. अब यहां से न केवल व्यापार, बल्कि नदी की संस्कृति ही गायब हो चुकी है. कई किलोमीटर तक केवल बंजर भूमि ही नजर आती है.