भारतीय संविधान के जनक और भारत रत्न डॉ भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि को हर साल 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1956 में इसी दिन उन्होंने संसार को अलविदा कहा था। बाबा साहब एक विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने दलित समाज, मजदूर वर्ग और महिलाओं के प्रति सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और अभियान चलाए ।

बाबासाहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के दलित परिवार में हुआ था। उन्हें अपना सारा जीवन हिंदू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष करने में बिता दिया। समाज के प्रति उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया। आज हम आपको उनके बारे में 10 ऐसी रोचक बातें बताने जा रहे हैं जिनसे ज्यादातर लोग अनजान हैं।

  • 14 अक्टूबर 1956 को बाबासाहेब ने नागपुर में अपने पांच लाख साथियों के साथ बौद्धधर्म की दीक्षा ली। भारतीय बौद्ध भिक्षुओं ने उन्हें बोधिसत्व की उपाधि प्रदान की है, हालांकि उन्होंने खुद को कभी भी बोधिसत्व नहीं कहा।
  • अंबेडकर अपने पिता-माता रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14 वीं व अंतिम संतान थे।
  • अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे। उनके पिता भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे और यहां काम करते हुये वो सूबेदार के पद तक पहुंचे थे।
  • स्कूली पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद अंबेडकर और अन्य अस्पृश्य बच्चों को विद्यालय में अलग बिठाया जाता था। उनको कक्षा के अन्दर बैठने की अनुमति नहीं थी, साथ ही प्यास लगने प‍र कोई ऊंची जाति का व्यक्ति ऊंचाई से पानी उनके हाथों पर पानी डालता था, क्योंकि उनको न तो पानी, न ही पानी के पात्र को स्पर्श करने की अनुमति थी।
  • अपने एक प्रिय ब्राह्मण शिक्षक महादेव के कहने पर अंबेडकर ने अपने नाम से सकपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ लिया जो उनके गांव के नाम “अंबावडे” पर आधारित था।
  • अंबेडकर ने कानून की उपाधि प्राप्त करने के साथ ही विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति विज्ञान में अपने अध्ययन और अनुसंधान के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से कई डॉक्टरेट डिग्रियां भी अर्जित कीं।
  • 1948 से अंबेडकर मधुमेह से ग्रस्त हो गए। जून से अक्टूबर 1954 तक हालत काफी खराब रही साथ ही आंखों की रोशनी भी जाती रही। राजनीतिक मुद्दों से परेशान अंबेडकर का स्वास्थ्य बद से बदतर होता चला गया और 1955 के दौरान किए गए लगातार काम ने उन्हें तोड़ कर रख दिया।
  • अंबेडकर के निधन के बाद उनके परिवार में उनकी दूसरी पत्नी सविता अम्बेडकर रह गईं थीं जो जन्म से ब्राह्मण थीं लेकिन उनके साथ ही वो भी धर्म परिवर्तित कर बौद्ध बन गईं थीं। विवाह से पहले उनकी पत्नी का नाम शारदा कबीर था। सविता अंबेडकर की साल 2002 में मृत्यु हो गई।