नई दिल्ली: भारत देश में अंधविश्वास की जड़ें बहुत मजबूत हैं. गांव-देहात में इससे जुड़ी कहानियां अक्सर देखने को मिल जाती हैं. मगर इस प्रकोप से शहर भी दूर नहीं है. आज भी कई ऐसे प्रमुख शहरें हैं जहां अंधविश्वास बहुत जोर से सांस लेती है. यह सब वहां रहने वाले लोगों पर निर्भर करता है. बीते दिनों एक ऐसी खबर आई है जिसने यह साबित किया है कि अंधविश्वास से परहेज करने वाले भी लोग इस देश में रहते हैं. दिल्ली के बुरारी स्थित एक घर में जहां साल 2018 की जुलाई में एक परिवार के 11 सदस्यों ने आत्महत्या कर ली थी, वहीं अब डॉ मोहन सिंह ने रहने का फैसला किया है. उसी घर में शिफ्ट हो चुके डॉमोहन ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि ‘मुझे इस हादसे से कोई समस्या नहीं है. यह घर सुविधाजनक है क्योंकि यह सड़क के पास है. मैं अंधविश्वासी नहीं हूं”.

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डॉ मोहन के इस बयान ने यकीनन अंधविश्वास की एक मजबूत चट्टान को तोड़ने की हिम्मत दिखाई है. डॉ मोहन के परिवार ने इस घर में प्रवेश करने के बाद पूजा आरती भी की और कहा ‘हम खुश है इस घर से’.