पुनर्जन्म में कोई भले ही विश्वास न रखे लेकिन ये तो सच है कि व्यक्ति का पुनर्जन्म होता है।  माना जाता है दुनिया में 84 लाख योनियां हैं। इनमें अपने कर्मों के हिसाब से लोगों को जन्म मिलता है। इसका उल्लेख पुराणों में भी है। हिंदुओं में पुनर्जन्म को मान्यता दी गई है लेकिन कई धर्मों में ऐसा नहीं है। लेकिन कई ऐसी बातें हैं जिनके आधार पर आप पता लग सकते हैं कि किसी व्यक्ति का पुनर्जन्म हुआ है। हालांकि ऐसे मामले कम ही देखने को मिलते हैं लेकिन जितने भी मामले हैं वे पुनर्जन्म की गुत्थी पर सवाल उठाने के लिए काफी हैं। Also Read - इंजीनियरिंग की छात्रा को पिछले जन्म की जीवनसाथी बताकर महिला ने की अपहरण की कोशिश, अरेस्ट

अक्सर लोगों को अजीब से अहसास होने लगते हैं, जिसे वे अच्छी तरह से न तो समझ पाते हैं, न ही इसके पीछे छिपे कारणों को समझ पाते हैं। लेकिन आज हम आपको इन अनोखे अहसासों के बारे में कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिसे सुनने के बाद आप सोच में पड़ जाएंगे। क्या आपको भी अपनी पिछली जिन्दगी को लेकर ये अजीब एहसास होते हैं? तो इसका मतलब है आपका पुनर्जन्म हुआ है.. कैसे? आइये हम आपको बताते हैं। Also Read - rebirth of nagin as a girl | चमत्कार!! इच्छाधारी नागिन का हुआ पुनर्जन्म, लगा लोगों का जमघट

डर
अगर आप बेवजह किसी वस्तु या व्यक्ति से डरते हैं और आपको किसी परिस्थिति से भय लगता है, कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि व्यक्ति उन चीजों से डरता है, जिससे आम जनता को डर नहीं लगता। तो इसका मतलब है कि इस भय के साथ आपकी पिछली जन्म की यादें जुडी हुई हैं। Also Read - Amitabh Bachchan | Rebirth | Gratitude | Film Coolie | अमिताभ बच्चन ने 'पुनर्जन्म' की दुआ मांगने वालों का आभार जताया

यादें
अगर आपको ऐसा लगता है कि किसी व्यक्ति से आप पहले मिल चुके हैं, या कुछ घटनाओं को देखकर आपको ऐसा लगता है कि वे पहले भी हो चुकी हैं, तो इसका अर्थ है आपके मन में पिछले जन्म की यादें अब भी ताजा हैं।

सपने
किसी सपने का बार-बार आना या सपने में एक ही जगह बार-बार दिखाई देना, किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद अजीब हो सकता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसका मतलब है इन सपनों का आपके पिछले जन्म से कुछ संबंध है।

आकर्षण
यदि आपको किसी खास जगह से या किसी खास व्यक्ति की ओर अगर आप आकर्षित होते हैं, तो इसका मतलब है कि आप पिछले जन्म में उस जगह या व्यक्ति से ताल्लुक रखते थे। यह भी पढ़ें:  इच्छाधारी नागिन का हुआ पुनर्जन्म, लगा लोगों का जमघट

हालांकि विज्ञान पुनर्जन्म को नहीं मानता लेकिन किताब ‘द मेकर ऑफ हैवेनली ट्राउजर्स’ के लेखक प्रो. डेनियल वेयर ने अपनी किताब में पुनर्जन्म और इससे जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने अपनी किताब में एक ऐसी घटना का जिक्र किया है जिसके बाद आप भी पुनर्जन्म पर विश्वास करने लगेंगे।

“बात सन् 1905 की है यह वो समय था जब रूस में क्रांति हो रही थी।  यहीं पर प्रो. डेनियल वेयर रहते थे। वेयर प्रसिद्ध विचारक थे। उन्होंने एक बार किसी से सुना था कि चीन में तंत्र-मंत्र के जानकार बौद्ध लामा रहते हैं जो पिछले जन्म की घटनाओं को सपने में देखने की क्षमता रखते हैं।

वेयर, चीन की ओर चल दिए। वह उस तांत्रिक लामा से चीन के बौद्ध मंदिर मे मिले। उन्होंने लामा से पुनर्जन्म के रहस्य को बयां करने का अनुरोध किया। तब बौद्ध लामा ने एक नवयुवक पर प्रयोग करके दिखाया। युवक गहरी नींद में सो गया।

तब लामा ने प्रो. वेयर को बताया, ‘योग निद्रा द्वारा पुनर्जन्म के बारे में बताया जाता है। योग निद्रा का उद्गम भारत में हुआ। फिर वह चीन, जापान और दुनिया के अन्य देशों में पहुंचा।’

बातचीत जब खत्म हुई तो वो नवयुवक जाग चुका था। तब लामा ने उस युवक से पूछा, ‘तुमने सपने में क्या देखा?’ उसने बताया, मैंने दो सपने देखे।

पहला सपना रूस का था। मैं रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में था। जहां मेरी प्रेमिका एक बड़े शीशे के सामने श्रृंगार कर रही थी। उसे दासियां क्रास ऑफ अलेक्जेण्डर हीरे की अंगूठियां पहना रही थीं। मैनें उसे मना किया अंगूठी मत पहनो। यह सब कुछ मैं रसियन भाषा में कह रहा था। मुझे प्रेमिका से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

और दूसरे सपने में, ‘मैं एक रेगिस्तान में था। जहां मेरे दो बच्चे भूख से तड़प रहे थे। और मैं उनके लिए भोजन नहीं दे पाया। इसी बीच एक ऊंट ने मेरा हाथ में काट लिया। इस तरह मेरी मौत हो गई। औऱ आपने उठा दिया।’

प्रो. डेनियल वेयर लामा और उनके सपने सुनाने वाले शिष्य से मिलकर रूस लौट आए। एक दिन अचानक पीटर्सबर्ग में उनकी भेंट एक वृद्ध महिला से हुई। उन्होंने उस महिला से लामा के सामने घटित पूरी घटना का जिक्र किया।

जैसे-जैसे वेयर उस महिला को बताते गए वह महिला हैरान होती गई। वह इसीलिए कि जिस महल की बात वो नवयुवक कर रहा था। वह उस वृद्ध महिला की ही हवेली थी।

और क्रास ऑफ अलैक्जेण्डर हीरे की अंगूठी की बात भी सच थी। तब उस वृद्ध महिला ने बताया कि, सालों पहले मेरा प्रेमी रास्पुटिन उस अंगूठी को पसंद नहीं करता था। वह हमेशा उस अंगूठी को पहनने से रोकता था।

प्रो. वेयर हैरान थे। अब तक वह पुनर्जन्‍म के सिद्धांत को महज एक काल्पनिक मिथ मानते थे, लेकिन इस घटना की सच्चाई ने उनका नजरिया ही बदल दिया और फिर उन्होंने यह किताब लिखी।”