भुत पिचास या बुरी आत्मा नाम सुनते है मन कॉप उठता है और मानो लगता है कोई अदृश्य शक्ति आज भी आस पास है। भूतो को लेकर अलग अलग विचार है कुछ लोग हकीकत मानते है तो कुछ लोग इसे मिथक और काल्पनिक विचार कहते है । लेकिन अगर भगवान है तो प्रेत आत्माए भी होती है

वैसे तो भारत में कई ऐसी जगह है जिसे भुतिया माना जाता है। लेकिन अगर बात राजस्थान के भानगढ़ की बात करे तो आँखे खुली की खुली रह जाती है। एक ऐसा शापित किला जिसमे सिर्फ वीराना पसरा रहता है और सूर्यास्त के समय भानगढ़ के किले में अगर कोई गया तो ज़िंदा वापस नही आता है। भूतो के ख़ौफ़ का डर यहां तक है की पुरातत्‍व वि‍भाग ने भी अपना कार्यालय इससे एक कि‍मी की दूरी पर बना रखा है। उन्‍होंने भूत-प्रेत होने की बात तो कभी नहीं कही लेकि‍न इतना जरूर है उन्‍होंने भी वहां कुछ अजीब घटनाएं और फ्रीक्‍वेंसी होने का एहसास कि‍या है।

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भानगढ किला सत्रहवीं शताब्‍दी में बनवाया गया था। इस किले का निर्माण जयपुर महाराजा मान सिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने करावाया था। राजा माधो सिंह उस समय अकबर के सेना में जनरल (मनसबदार) के पद पर तैनात थे। उस समय भानगढ की जनसंख्‍या तकरीबन 10,000 थी। भानगढ़ अलवर जिले में स्थित एक शानदार किला है जो विशाल आकार में निर्मित किया गया है। यह भी पढ़े-दुनिया का सबसे बड़ा तोप: 35 किलोमीटर तक है जिसकी मारक शक्ति, तोप के एक गोले से बन गया तालाब

भानगढ़ किला जो देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। भानगढ़ किले के बारें में प्रसिद्ध एक कहानी के अनुसार यहाँ की राजकुमारी रत्‍नावती जो कि नाम के ही अनुरूप अति सुन्दर थी के रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी तो वही राजकुमारी रत्नावती से एक कला जादू करने में माहिर तांत्रिक सिंघिया की नज़र थी।

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प्रेम में तो तांत्रिक को राजकुमारी नही मिली लेकिन जादूगर सिंघिया को मौत जरूर मिली। लेकिन मरते वक़्त सिंघिया का दिये श्राप के कुछ दिन बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्‍नावती भी उस शाप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। एक ही किले में एक साथ इतने बड़े कत्‍लेआम के बाद वहां मौत की चींखें गूंज गयी और आज भी उस किले में उनकी प्यासी आत्मा भटकती है। कई लोगो का दावा है की आज भी इन खण्डहरों में रोने और चीखने की आवाज सुनाई देती है। अकेले घूमने वालो को तो तलवारो की आवाज और चूडियों की खनखनाहट लोगो की आवाज को सुनने और महसूस करने का दवा करते है।

फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा बनाई गई आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम देख रही हैं। इस पुरे भानगढ़ को सूर्यास्त से पहले खाली करा दिया जाता है। लेकिन सन्नाटे से घिरा भानगढ़ का ये किला मानो अपने इतिहास को बतान के लिए बेबस खड़ा नज़र आता है।