नई दिल्लीः अपने प्यार की तलाश में आपने इंसानों को तो यहां से वहां चक्कर काटते तो देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी किसी जानवर को ऐसा करते देखा है. नहीं ना, लेकिन क्या हो जब आपको पता चले कि एक बाघ (Tiger) अपने प्यार को ढूंढने के लिए न सिर्फ यहां-वहां भटकता रहा, बल्कि उसने 150 दिनों तक अपने प्यार की तलाश की और इस दौरान उसने करीब 6 जिलों की यात्रा की. जी हां, एक वन अधिकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र (Maharashtra) के बुलढाणा जिले के ज्ञानगंगा अभयारण्य में पहुंचने से पहले एक बाघ ने तेलंगाना (Telangana) और महाराष्ट्र के करीब 6 जिलों की पैदल यात्रा की, वो भी अपने प्यार की तलाश में.

वन अधिकारी के मुताबिक, एक बाघ ने महाराष्ट्र और तेलंगाना में छह जिलों में फैले 1,300 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र की यात्रा की. रेडियो-कॉलर वाले बाघ, TWLS-T1-C1 को अपने जन्म स्थान से नए क्षेत्र तक पहुंचने के लिए लगभग 150 दिन लगे. नई जगह पहुंचने के लिए उसने महाराष्ट्र के यवतमाल (Yavatmal) जिले के टिपेश्वर बाघ रिजर्व को उसने जून 2019 में छोड़ दिया था. यह बात टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, रविकिरन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है.

रविकिरन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि, T1-C1 का जन्म 2016 के अंत में TWLS-T1 के निवास स्थान टिपेश्वर में हुआ था. बाघ के दो पुरुष भाई-बहन C2 और C3 हैं, जो 2019 की शुरुआत में सभी अलग हो गए. बाघों की निगरानी और उनके व्यवहार के अध्ययन के लिए C1 को 27 मार्च, 2019 को WII, देहरादून की टीम द्वारा रेडियो-कॉलर किया गया था.

अध्ययन का उद्देश्य उप-वयस्कों के फैलाव पैटर्न की निगरानी करना था जो सामान्य रूप से अपने को स्थापित करने के लिए नए क्षेत्र की खोज कर रहे हैं. C3 भी रेडियो कॉलर वाला था. टीपेश्वर के अंदर प्रारंभिक मूवमेंट के बाद, सी 3 और सी 1 ने पांडारकवाड़ा डिवीजन की खोज शुरू की और तेलंगाना पहु्ंच गए. जुलाई 2019 के मध्य में, C3 तेलंगाना में चला गया और आदिलाबाद शहर पहुंच गया, लेकिन बाघ वहां बसने के बजाय करीब 10 दिनों में वापस टीपेश्वर लौट आया.