इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में हर साल पांच दिवसीय दीपोत्सव की धार्मिक परंपरा से जुड़े हिंगोट युद्ध कई लोग घायल हो जाते हैं, लेकिन ये परंपरा अभी रोकी नहीं जा सकी है. मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में दिवाली के दूसरे दिन धार्मिक परंपरा से जुड़े हिंगोट युद्ध में सोमवार रात लगभग 40 लोग घायल हो गए. हिंगोट युद्ध में हर साल कई लोग घायल हो जाते हैं और इस पारंपरिक आयोजन में कुछ घायलों की मौत भी हो चुकी है.

इस पारंपरिक जंग के आयोजकों में शामिल एक व्यक्ति ने मंगलवार बताया कि इंदौर से करीब 55 किलोमीटर दूर गौतमपुरा कस्बे में हिंगोट युद्ध के दौरान करीब 40 लोग मामूली रूप से घायल हुए. इनमें से ज्यादातर “योद्धा” घायल होने के बाद घर लौट गए.

हिंगोट आंवले के आकार वाला एक जंगली फल है. गूदा निकालकर इस फल को खोखला कर लिया जाता है. फिर हिंगोट को सुखाकर इसमें खास तरीके से बारूद भरा जाता है. नतीजतन आग लगाते ही यह रॉकेट जैसे पटाखे की तरह बेहद तेज गति से छूटता है और लंबी दूरी तय करता है. गौतमपुरा कस्बे में दीपावली के अगले दिन यानी विक्रम संवत की कार्तिक शुक्ल प्रथमा को हिंगोट युद्ध की धार्मिक परंपरा निभाई जाती है.

गौतमपुरा के योद्धाओं के दल को “तुर्रा” नाम दिया जाता है, जबकि रुणजी गांव के लड़ाके “कलंगी” दल की अगुवाई करते हैं. दोनों दलों के योद्धा रिवायती जंग के दौरान एक-दूसरे पर हिंगोट दागते हैं. हिंगोट युद्ध में हर साल कई लोग घायल होते हैं और इस पारम्परिक आयोजन में कुछ घायलों की मौत भी हो चुकी है.

माना जाता है कि प्रशासन हिंगोट युद्ध पर इसलिए पाबंदी नहीं लगा पा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय लोगों की धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं. पुलिस के एक एसडीओपी ने बताया कि घायलों में शामिल 19 लोग मौके पर लगाए गए मेडिकल शिविर में पहुंचे, जिन्हें प्राथमिक इलाज के बाद घर जाने की इजाजत दे दी गई. अधिकारी ने बताया कि हिंगोट युद्ध के मद्देनजर पुलिस ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर जरूरी इंतजाम किए थे.