हमारा देश विविधताओं से भरा है. लोग अनेक तरह से त्योहारों को मनाते हैं. इनमें से कई तरीके बड़े ही अनोखे होते हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. Also Read - Trending: लड़की ने किया ऑनलाइन खाना ऑर्डर, 42 डिलीवरी ब्वॉय पहुंचे घर पर...

दिवाली का त्योहार यूं तो दीयों का पर्व कहा जाता है. लोग पटाखे चलाते हैं, दीप जलाते हैं पर कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसे गांव में लोग गोबर संग दिवाली मनाते हैं. Also Read - Supreme Court: ऑनलाइन सुनवाई में बिना कमीज पहने पहुंचा शख्स, जज का गुस्सा फूटा, फिर ये हुआ...

ये गांव है गुमतापुरा. यहां लोग एक-दूसरे पर गोबर फेंककर इस त्योहार को मनाते हैं. दीपावली के 2 दिन के बाद इस त्योहार को गांव में मनाने की परंपरा है, जो सैकड़ों सालों से चली आ रही है. Also Read - Video: बॉडी बिल्डर ने 'डॉल' संग रचाई शादी, सोशल मीडिया पर Viral

इस पंरपरा के मुताबिक गांव में सुबह से इसकी तैयारी शुरू होती है. पूरे गांव मे घूम-घूम कर गोबर इकट्ठा किया जाता है, जिसे गांव के मंदिर के पीछे हिस्से में रखा जाता है.

एक व्यक्ति को सांकेतिक रूप से दोषी बनाकर उसे नकली मूंछ और दाढ़ी लगाई जाती है, फिर गधे की सवारी कराई जाती है और प्रतीकात्मक रूप में वो बुरी शक्तियों को गालियां देते हैं. अंत मे मंदिर पहुंचकर लोग एक-दूसरे पर गोबर फेंकते है.

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यहां एक किंवदंती है. इसके अनुसार लोग इस विश्वास के साथ इस त्योहार को मनाते हैं कि एक महात्मा के कपड़े और उसका समान ने जमीन में काफी समय दबे रहकर शिवलिंग का रूप ले लिया.

उस समय ये जगह गोबर के ढेर से घिरा था. गांव के लोगो के लिये गोबर सबसे पवित्र हैं क्योंकि गांव के स्थानीय देवता केरे ईश्वरब स्वामी, इसे पवित्र मानते थे.