नई दिल्ली: उम्र सिर्फ 16 साल है. 10वीं क्लास में पढ़ती है, लेकिन जब बोलती है तो दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं की भी बोलती बंद हो जाती है. ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) हों या कोई और देश के राष्ट्रध्यक्ष, सब सामने बैठी ग्रेता थनबर्ग (Greta Thunberg) की खरी-खोटी सुनते रहते हैं. पर्यावरण मुद्दे (Environment) को लेकर गुस्साई ग्रेता ने यूएन (Greta Thunberg Speech in United Nation) में भाषण देते हुए विश्व नेताओं को ये तक कह दिया कि ‘आखिर आप लोगों की हिम्मत कैसे हुई, मुझे धोखा देने की.’ ग्रेता ने कहा कि अगर आपने फिर हमें असफल कर दिया तो हम आपको कभी माफ़ नहीं करेंगे. हम सामूहिक विप्लुति की कगार पर हैं और आप आर्थिक विकास की बातें कर रहे हैं. आपकी हिम्मत कैसे हुई?

विश्व नेताओं के सामने यूएन में इतने तल्ख़ बयान के बाद ग्रेता थनबर्ग की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. सभी जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये 16 साल की लड़की कौन है (Who is Greta Thunberg), जिसकी खरी खोटी बातें विश्व के ताकतवर से ताकतवर से नेता चुपचाप सुनते रहते हैं. ऐसी बातें अगर कोई राष्ट्राध्यक्ष दूसरे देश के राष्ट्रध्यक्ष को सुना देता है तो युद्ध की स्थिति बन जाती है, लेकिन ग्रेता को जवाब देने की बजाय सब सुन रहे हैं.

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स्वीडन की है ग्रेता
ग्रेता थनबर्ग स्वीडन (Sweden) की रहने वाली है. स्वीडन एक यूरोपियन देश है. स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में जन्मी ग्रेता दुनिया की सबसे छोटी और इस समय सबसे सक्रिय पर्यावरण कार्यकर्ता है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान क्लाइमेट चेंज की ओर खींचने की कोशिश की है और पूरी दुनिया उसे सुन रही है. ग्रेता की मां स्वीडन की मशहूर ओपेरा सिंगर हैं. जबकि उसके पिता मशहूर एक्टर हैं. ग्रेता स्वीडन के बड़े और प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है.

हर शुक्रवार को छोड़ा स्कूल, संसद के बाहर किया प्रदर्शन
कुछ समय पहले ग्रेता ने क्लाइमेट चेंज (Climate Change) के बारे में पढ़ा. ग्रेता को पर्यावरण बदलावों के बारे में इतनी चिंता हुई, वह इतनी विचलित हुई कि उसने लड़ने का सोच लिया. ग्रेता ने इसके लिए स्कूल छोड़कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. ग्रेता ने हर शुक्रवार को स्कूल बंक कर स्वीडन की संसद के बाहर अकेले ही प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. ग्रेता ने तख्ती पर लिखा- ‘जलवायु के लिए स्कूल से छुट्टी’. ग्रैटा के इस आंदोलन की चर्चा दुनिया भर में है और 20 सितंबर 2019 को 150 देशों में आंदोलन हुआ. ग्रेता ने कहा कि हालात उससे भी कहीं अधिक खराब हैं, जितने हमें दिखाई देते हैं. और जब ये दुनिया ही नहीं रहेगी तो वह और बाकी कोई भी पढ़कर और तरक्की करके क्या करेगा. अगस्त 2018 से हर शुक्रवार स्कूल छोड़कर जलवायु परिवर्तन के लिए आवाज उठाने वाली ग्रेटा आज पर्यावरण प्रेमियों की आवाज़ बन चुकी हैं. ग्रेटा थनबर्ग ने स्वीडन की संसद के बाहर तख्ती लेकर प्रदर्शन किया.

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अमेरिकी संसद में सांसदों को फटकारा
सिर्फ यूएन ही नहीं ग्रेता ब्रिटेन, इटली जैसे देशों की संसद में भी बोल चुकी हैं. 18 सितंबर को ही ग्रेता ने अमेरिका की संसद में बोलते हुए कहा था कि जलवायु को बेहतर बनाने के लिए अमेरिका की कोशिशें काफी नहीं हैं. वह यहां अपनी तारीफ़ सुनने नहीं आई हैं. न यह सुनने कि वह किसी को प्रेरित करती हैं. वह जानना चाहती हैं कि आखिर उन्होंने (सांसदों ने) पर्यावरण के लिए किया क्या है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाला देश है.

यूएन में खरी खोटी सुनाईं
ग्रेटा ने अपने 23 सितंबर को यूएन में दुनिया के बड़े नेताओं के सामने अपने भाषण में कहा, “आपने हमारे सपने, हमारा बचपन अपने खोखले शब्दों से छीना. हालांकि, मैं अभी भी भाग्यशाली हूं. लेकिन लोग झेल रहे हैं, मर रहे हैं, पूरा ईको सिस्टम बर्बाद हो रहा है.” अपने संबोधन के दौरान ग्रेटा भावुक हो गई और कहा, “आपने हमें असफल कर दिया. युवा समझते हैं कि आपने हमें छला है. हम युवाओं की आंखें आप लोगों पर हैं और अगर आपने हमें फिर असफल किया तो हम आपको कभी माफ नहीं करेंगे.” ग्रेता ने कहा, “हम सामूहिक विलुप्ति की कगार पर हैं और आप पैसों और आर्थिक विकास की काल्पनिक कथाओं के बारे में बातें कर रहे हैं. आपकी हिम्मत कैसे हुई?” ग्रेटा ने कहा कि दुनिया जाग चुकी है और आपको यहां इसी वक्त लाइन खींचनी होगी. ग्रेटा ने दुनियाभर के बच्चों और आज की युवा पीढ़ी की आवाज को सामने रखते हुए कहा कि युवाओं को समझ में आ रहा है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आपने हमें छला है और अगर आपने कुछ नहीं किया तो युवा पीढ़ी आपको माफ नहीं करेगी.

पीएम मोदी से भी कर चुकी हैं सवाल

UN सम्मेलन में बोलीं और दुनिया के नेताओं पर विश्वासघात का आरोप लगाया. दिसंबर 2018 में पोलैंड में भी UN की बैठक में ग्रेटा थनबर्ग ने भाषण दिया था. उसने दुनिया के नेताओं को ‘ग़ैरज़िम्मेदार बच्चा’ कहा और जनवरी 2019 में दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में भाषण भी दिया. ग्रैटा सिर्फ संयुक्त राष्ट्र में ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, इटली, यूरोपीयन संसद में भी बोल चुकी हैं. इससे पहले ग्रेता अपने बयानों में पीएम मोदी (Narendra Modi) के लिए भी सवाल कर चुकी हैं.

पर्यावरण के लिए हवाई सफर छोड़ा
18 सितंबर को ग्रेता अमेरिका पहुंची थीं, लेकिन वह हवाई सफर करके नहीं बल्कि नाव से गईं. उनका कहना था कि हवाई जहाज ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन करते हैं. स्वीडन से अमेरिका पहुंचने में ग्रेता को करीब तीन दिन लगे थे और ये जोखिम भरा सफर था. ग्रेता की कोशिशों को पूरी दुनिया का साथ मिल रहा है. लोग पर्यावरण की बातें कर रहे हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रेता का मजाक उड़ा चुके हैं.