नई दिल्ली: देश में कॉन्डम इस्तेमाल करने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है. स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 8 सालों में देश में कॉन्डम के इस्तेमाल में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं नसबंदी कराने के मामले में 75 फीसदी की कमी आई है. इतना ही नहीं सामान्य पिल्स के इस्तेमाल मे भी करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है. मंत्रालय की यह रिपोर्ट 2008 से 2016 के बीच किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई है.

जहां तक कॉन्डम के इस्तेमाल का सवाल है, केरल जैसे सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाले राज्य में इसमें 42 फीसदी तक की कमी आई है. इसके उलट बिहार में इसका प्रयोग करने वालों की संख्या पिछले आठ सालों के दौरान चार गुना बढ़ी है. वहां पिल्स का इस्तेमाल भी बढ़ा है. रिपोर्ट के अनुसार देश के ज्यादातर कपल्स अब परिवार नियोजन के लिए अबॉर्शन और इमरजेंसी पिल्स का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं. हालांकि कॉन्ट्रासेप्टिव्स के कुल इस्तेमाल में भी 35 फीसदी की गिरावट आई है.

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का कहना है कि सरकार जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों के तहत बच्चा पैदा होने के तत्काल बाद या गर्भपात के बाद परिवार नियोजन की आवश्यकता में कमी को पूरा करने पर जोर दे रही है. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर ‘जनसंख्या स्थिरीकरण : एक अधिकार और उत्तरदायित्व ‘ विषयक एक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए , नड्डा ने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों के साथ एक आर्थिक बहस भी जुड़़ी हुई है , क्योंकि देश की युवा जनसंख्या का लाभ केवल तभी उठाया जा सकता है जब जनसंख्या स्वस्थ हो.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि देश कुल मिला कर प्रजनन दर (टीएफआर) में लगातार गिरावट हासिल करने में सफल हुआ है. टीएफआर का अर्थ है कि अपने जीवनकाल में एक महिला औसतन कितने बच्चे पैदा करती है. उन्होंने कहा वर्ष 2015 में 2.9 के कुल प्रजनन दर (टीएफआर) से वर्ष 2018 में इस दर का 2.2 प्रतिशत रहने का मतलब है कि भारत में इस मामले में गिरावट की दर अच्छी है. नड्डा ने कहा कि देश में गर्भनिरोधक उपायों के विकल्पों का विस्तार हुआ है जिससे गर्भनिरोधक उपायों के अपनाए जाने का विस्तार होगा.