Capt. Amarinder Singh Profile: कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं. एक समय पूर्व मुख्यमंत्री का कांग्रेस (Indian National Congress) पार्टी में बड़ा दबदबा था. पंजाब में कांग्रेस मतलब कैप्टन अमरिंदर सिंह ही थे. हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के चलते उन्होंने साल 2021 में मुख्यमंत्री पद और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस (Punjab Lok Congress) नाम से एक नई पार्टी का गठन किया. अब उनकी यह पार्टी भाजपा (BJP) के साथ मिलकर पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 (Punjab Assembly Election 2022) के मैदान में उतर रही है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ी हो. इससे पहले भी उन्होंने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के चलते कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वह 1998 में पार्टी में वापस लौटे. कैप्टन अमरिंदर सिंह साल 2002 से 2007 और 2017 से सितंबर 2021 तक पंजाब के मुख्यमंत्री (Chief Minister of Punjab) रहे. कैप्टन अमरिंदर सिंह के पिता महाराजा यादवेंद्र सिंह पटियाला रियासत के अंतिम राजा थे. राज परिवार ताल्लुक रखने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय सेना (Indian Army) में भी सेवाएं दी और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965 India Pakistan War) में लड़े.Also Read - Hardik Patel ने कांग्रेस का दामन छोड़ा, गुजरात चुनाव से पहले पार्टी को लगा बड़ा झटका | वीडियो देखें

कैप्टन अमरिंदर सिंह का व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा (Personal life and Educational Qualification of Captain Amarinder Singh)

कैप्टन अमरिंदर सिंह का जन्म 11 मार्च 1942 को पटियाला के अंतिम महाराजा यादवेंद्र सिंह और महारानी मोहिंदर कौर के घर हुआ था. वह फुलकियां राजवंश से ताल्लुक रखते हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रारंभिक पढ़ाई लोरेटो कॉन्वेंट, तारा हॉल, शिमला और लॉरेंस स्कूल, सनावर में हुई थी. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून के दून स्कूल चले गए. उनकी पत्नी का नाम प्रनीत कौर (Praneet Kaur) है और वह भी सासंद रह चुकी हैं. प्रनीत कौर ने साल 2009 से अक्टूबर 2012 तक विदेश राज्य मंत्री के तौर पर अपने सेवाएं दीं. कैप्टन अमरिंदर सिंह के एक पुत्र रनिंदर सिंह और एक पुत्री जय इंदर कौर हैं. Also Read - योगी आदित्यनाथ के राज में अब नए मदरसों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद, कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला

अमरिंदर सिंह की बड़ी बहन हरमिंदर कौर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह (Natwar Singh) की पत्नी हैं. उनका संबंध शिरोमणि अकाली दल (ए) के प्रमुख और पूर्व आईपीएस अधिकारी सिमरनजीत सिंह मान से भी है. सिमरनजीत सिंह की पत्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी प्रनीत कौर दोनों बहनें हैं. Also Read - पंजाब में 23 किसान संगठनों का मार्च, मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर धरने पर बैठे | Watch Video

Amrinder Singh From Army Captain to CM of Punjab

नेशनल डिफेंस अकेडमी (NDA) और इंडियन मिलिट्री अकेडमी (IMA) से ग्रेजुएशन करने के बाद अमरिंदर सिंह ने साल 1963 से 1966 तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं. उन्हें सिख रेजीमेंट में नियुक्ति मिली. उन्होंने दिसंबर 1964 से जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वेस्टर्न कमांड, लेफ्टिनेंट जनरल हरबख्श सिंह के सहयोगी के रूप में कार्य किया. साल 1965 की शुरुआत में उन्होंने अपने परिवार की देखभाल के लिए सेना की नौकरी छोड़ दी. लेकिन 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू होने पर वह वापस सेना में लौट गए. उनके पिता और दादा ने भी सेना में अपनी सेवाएं दी थीं. अमरिंदर सिह ने कई बार कहा भी है कि आर्मी हमेशा उनका पहला प्यार बनी रहेगी. उन्होंने अपने स्कूल समय के दोस्त राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के कहने पर राजनीति में कदम रखा. साल 1980 में वह पहली बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. वह पहली बार साल 2002 से 2007 और दूसरी बार 2017 से 2021 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे.

कैप्टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक करियर (Political Career of Captain Amarinder Singh)

कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने स्कूल समय के दोस्त राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में आए और 1980 में पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत सेना के एक्शन के विरोध में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और बाद में शिरोमणी अकाली दल (Shiromani Akali Dal) में शामिल हो गए. अकाली दल में वह तवंड़ी साबो से विधानसभा चुनाव जीते और राज्य सरकार में कृषि, वन, विकास और पंचायत मंत्री रहे. साल 1992 में वह शिरोमणी अकाली दल से अलग हो गए और शिरोमणी अकाली दल (पंथिक) नाम से एक अलग पार्टी बनाई. उनकी पार्टी ने विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन पार्टी बुरी तरह से हार गई. स्वयं कैप्टन अमरिंदर सिंह भी चुनाव हार गए. 1998 में वह वापस कांग्रेस में आ गए. वह साल 1999-2002, 2010-2013 और 2015-2017 तक तीन बार पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे. इसी दौरान वह 2002-2007 और 2017 से सितंबर 2021 तक दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और नरेंद्र मोदी नाम की लहर के दौरान भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर से वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) को बड़े अंतर से हराया था. वह अब तक पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. तीन बार उन्होंने पटियाला शहरी विधानसभा क्षेत्र और एक-एक बार सामना और तलवंडी साबो से चुनाव जीता है. साल 2017 में उनके ही नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव जीता और कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) से तनातनी की खबरों के बीच 18 सितंबर 2021 को उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और बाद में उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस नाम से अपनी नई पार्टी बनाई. पंजाब लोक कांग्रेस 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतर रही है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की कुल संपत्ति और सैलरी (Captain Amarinder Singh’s Net Worth)

विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान चुनाव आयोग में दाखिल अपने हलफनामे में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि उनके पास कुल 48 करोड़, 31 लाख , 71 हजार से ज्यादा की संपत्ति है और इसी हलफनामे में उन्होंने बताया कि उन पर 42 लाख, 7 हजार से ज्यादा की देनदारी भी है. कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के विधायक हैं उन्हें एक विधायक के तौर पर सैलरी के साथ ही एक पूर्व सांसद होने के नाते पेंशन भी मिलती है. हलफनामे के अनुसार कैप्टन अमरिंदर सिंह का प्रोफेशन पॉलिटिक्स और उनकी पत्नी प्रनीत कौर का व्यवसाय राजनीति और बिजनेस है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह पर दर्ज केस (Cases on Captain Amarinder Singh)

विधानसभा चुनाव 2017 के उनके हलफनामे के अनुसार कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आईपीसी की धारा 409, 420, 465, 467, 468, 471, 201, 120B के तहत दिसंबर 2007 से, धारा 420, 467, 468, 471, 120B के तहत फरवरी 2009 से और 176, 177, 181, 186, 187, 193, 199 धाराओं के तहत 2016 से और धारा 120 के तहत जून 2008 से मामले दर्ज हैं.