Punjab, APP, Punjab Ekta Party, Congress, Rahul Gandhi, Captain Amarinder Singh, Sukhpal Singh Khaira, Arvind Kejriwal Latest News Update: पंजाब एकता पार्टी बनाने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन बागी विधायकों ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की और अपने संगठन के कांग्रेस में विलय की घोषणा की. राहुल गांधी से मिलने वाले विधायकों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष (पंजाब) सरदार सुखपाल सिंह खैरा (विधायक, भोलाथ), सरदार जगदेव सिंह (विधायक, मौर) और पीरमल सिंह (विधायक, भदौर) शामिल रहे. तीन जून को नई दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ बैठक से पहले अमरिंदर सिंह ने आप के तीन बागी विधायकों सुखपाल खैरा, पीरमल सिंह और जगदेव सिंह कमलू को पार्टी में शामिल किया था.Also Read - राहुल गांधी ने ली कोविड रोधी टीके की पहली खुराक, अप्रैल में हो गए थे संक्रमित

दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने इन तीनों विधायकों का पार्टी में स्वागत किया था. कभी अमरिंदर सिंह की कड़ी आलोचना करने वाले फायरब्रांड खैरा ने कांग्रेस छोड़ दी थी और दिसंबर 2015 में आप में शामिल हो गए थे. वह 2017 में भोलाथ विधानसभा सीट से चुने गए थे. हालांकि, पंजाब विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता खैरा ने जनवरी 2019 में आप की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और अपनी खुद की पार्टी पंजाबी एकता पार्टी भी बना ली. अन्य दो विधायक कमलू और धौला पहली बार विधायक बने हैं. Also Read - प्रशांत किशोर कांग्रेस पार्टी में हो सकते हैं शामिल, अखिर क्यों राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से मांगी राय!

कांग्रेस में शामिल होने के बाद खैरा ने कहा कि आम आदमी पार्टी सिर्फ एक आदमी की पार्टी है. उन्होंने कहा कि साल 2015 अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ना एक गलती थी. उन्होंने कहा कि आप सिर्फ एक आदमी की पार्टी है और वहां अरविंद केजरीवाल के अलावा कुछ नहीं है. खैरा ने तुगलक लेन स्थित राहुल गांधी के आवास पर उनसे मुलाकात के बाद ये बात कही. Also Read - दिल्‍ली में सियासी मुलाकातें: शरद पवार मिले लालू यादव से, ममता बनर्जी मिलीं अरविंंद केजरीवाल से

उन्होंने कहा कि वो अपनी पुरानी पार्टी में दोबारा शामिल हो रहे हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर उन्हें भरोसा है. आप को अलोकतांत्रिक बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र या बातचीत की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से उन्हें अलोकतांत्रिक रूप से हटा दिया गया था और उसके बाद, उन्होंने पंजाब एकता पार्टी बनाने के लिए पार्टी छोड़ दी, जिसकी राज्य के हर जिले में इकाइयां हैं.