Punjab Crisis: पंजाब में कुछ महीनों में ही विधानसभा के चुनाव होनेवाले हैं और उससे पहले पंजाब कांग्रेस की मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के पैंतरे से कांग्रेस की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं. पहले तो अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और फिर नाटकीय तरीके से इसे वापस लेने वाले नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Sidhu) ने अब नया पैंतरा दिखाया है. सिद्धू ने अब आलाकमान के सामने नई मांग रख दी है. सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात का वक्त मांगा है. इसके साथ ही सिद्धू ने सोनिया गांधी को एक खत भी लिखा हैं. जिसमें उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नया एजेंडा दिया है और इसके साथ ही कैबिनेट में नए मंत्री बनाने की भी बात की है.Also Read - क्‍या शिवसेना कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले UPA में होगी शामिल? संजय राउत ने दिया ये जवाब

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा कि ‘पंजाब सरकार को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पूरा करना चाहिए.’ वह उनसे 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के घोषणापत्र का हिस्सा बनने के लिए 13 सूत्री एजेंडे के साथ एक पंजाब मॉडल पेश करने के लिए मिलना चाहते हैं और इसके लिए उनसे मुलाकात का समय मांगा है. Also Read - Loksabha में बोले राहुल गांधी, मेरे पास है आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की लिस्ट; इन्हें दीजिए मुआवजा

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बता देें कि सिद्धू दो दिन पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर चुके हैं. सिद्धू ने तब कहा था कि सभी मुद्दों का समाधान हो चुका है. सिद्धू ने राहुल गांधी के अलावा पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी. उन्होंने पंजाब की प्राथमिकता से जुड़े कुछ मुद्दे रखे हैं.

वहीं सिद्धू के सलाहकार और पूर्व आईपीएस मोहम्मद मुस्तफा की पत्नी रजिया सुल्ताना ने कहा है कि उन्हें लगातार कैप्टन अमरिंदर सिंह से धमकियां मिल रही हैं. बता दें कि रजिया सुल्ताना पंजाब सरकार में मंत्री भी हैं.

सिद्धू ने पंजाब के नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कुछ फैसलों से नाराजगी जताते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया था. हालांकि चन्नी और अन्य नेताओं के मनाने पर वो मान भी गए और फिर से अध्यक्ष पद संभाल लिया है. इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री रहे अमरिंदर सिंह के साथ उनके मतभेद जगजाहिर हैं. उनसे मतभेद के बाद में पंजाब में विधायक दल की बैठक बुलाई गई. अमरिंदर ने विधायक दल की बैठक के पहले ही मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था.