पंजाब के गुरदासपुर और फिरोजपुर में जल्द ही दो नई कैंपस यूनिवर्सिटियों की स्थापना की जाएगी. इसके अलावा चमकौर साहिब में स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की जा रही है. इसके पहले चरण के अंतर्गत स्किल कॉलेजों की स्थापना हेतु आईकेजीपीटीयू कपूरथला की तरफ से 120 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी गई है. लोक निर्माण विभाग द्वारा इस कार्य के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और इस साल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा कर दिया जायेगा.Also Read - पंजाब में टेस्ला की इकाई स्थापित करने के लिए सिद्धू ने एलन मस्क को किया आमंत्रित

पंजाब के तकनीकी शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंगलवार को कहा कि शहीद भगत सिंह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेकनॉलॉजी फिरोजपुर और बेअंत कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी गुरदासपुर को आगामी विधानसभा बजट सत्र में कैंपस यूनिवर्सिटी बनाने के लिए बिल पेश किया जायेगा. Also Read - भारत-पाक सीमा के पास अमृतसर में 5 किलो वजनी IED मिली, जिसमें 2.7 किलो RDX शामिल था

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मानक और बढ़िया करने के लिए आईआईटी रोपड़ के साथ एमओयू साइन किया गया है और आईआईटी रोपड़ को उनका मैंटर बनाया गया है. राज्य के सरकारी तकनीकी संस्थाओं में शिक्षा में व्यापक सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए गए. उन्होंने बताया कि सरकारी तकनीकी शिक्षा संस्थाओं के अध्यापकों / इंस्ट्रक्टरों की जवाबदेही तय की गई है, नकल पर मुकम्मल रोक लगाई गई है और सामूहिक नकल करवाने की दोषी पाई गईं संस्थाओं के खि़लाफ़ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई. राज्यभर के सभी संस्थानों में परीक्षाएं कैमरों की निगरानी में करवाने के लिए परीक्षा केन्द्रों में कैमरे लगवाए गए हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत संस्थानों में परीक्षा की निगरानी मुख्य कार्यालय के साथ ऑनलाइन भी जोड़ दी गई है. अब तक 25 सरकारी बहु-तकनीकी कॉलेजों और 114 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में कैमरे लगाए गए हैं. Also Read - Punjab: नवजोत सिंह सिद्धू बोले, 4-5 दिन में कांग्रेस की लिस्‍ट आएगी, PM मोदी, केजरीवाल पर निशाना

चन्नी ने बताया कि इन सुधारों के कारण ही लोगों की सरकारी तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में विश्वसनियता बढ़ी है, जिस कारण राज्य के सरकारी बहु-तकनीकी कॉलेजों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में दाखि़लों में भारी विस्तार हुआ है. कोविड-19 के बावजूद मौजूदा साल में राज्य के सरकारी बहु-तकनीकी कॉलेजों में 87 प्रतिशत दाखि़ले हुए, जबकि पिछली सरकार के समय यह दाखि़ला प्रतिशतता काफ़ी कम थी. उन्होंने बताया कि साल 2017-18 से राज्य के सरकारी बहु-तकीनकी कॉलेजों में सी.एम. स्कॉलरशिप स्कीम लागू की गई थी. इस स्कीम का मंतव्य मैरीटोरियस विद्यार्थियों को सरकारी बहु-तकनीकी कॉलेजों की तरफ प्रोत्साहित करना था.

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आई.टी.आई) की सीटें दुगुनी की गई हैं क्योंकि आई.टी.आई. कोर्सों में दाखिलों के लिए बड़ी संख्या विद्यार्थी इच्छुक थे, जिनको दाखिला नहीं मिल रहा था. इस साल कई गरीब विद्यार्थी सिर्फ 3400 रुपए की सरकारी फीस के साथ वोकेशनल निपुणता हासिल करने के योग्य होंगे. उनके अनुसार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को उद्योगों के अनुसार बनाने के लिए आई.टी.आई में ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (डी.एस.टी.) लागू किया गया. इस सिस्टम के अंतर्गत विद्यार्थी आई.टी.आई में 6 महीनों के लिए थ्यूरैटीकल ट्रेनिंग प्राप्त करते हैं और 6 महीनों के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए उद्योग में जाते हैं.