Coronavirus Vaccine Latest News: देश में जारी कोरोना संकट के बीच कई वैक्सीन पर शोध जारी है. भारत बायोटेक की कोरोना की वैक्सीन के पहले और दूसरे फेज का ट्रायल अलग-अलग शहरों में हो चुका है. अब तीसरे फेज का ट्रायल शुरू हुआ है. इसमें 10 हजार लोगों पर वैक्सीन की ट्रायल होगी. राजस्थान में जयपुर के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कोरोना वैक्सीन (Covid Vaccine Trail) का ट्रायल चालू है. अब तक करीब 300 लोगों को कोरोना की पहली डोज दी जा चुकी है. कोरोना वैक्सीन को लेकर सभी के मन में बहुत से सवाल है. इन सवालों का जवाब दिया इस रिसर्च के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर और कंसलटेंट प्लमोनोलोजिस्ट डॉक्टर मनीष कुमार जैन ने. पेश है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश: Also Read - COVID-19 Vaccination Drive: वैक्सीन का इंतजार हुआ खत्म, दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के लिए देश तैयार

सवाल: जयपुर में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल हो रहा है. इसकी क्या प्रक्रिया है? Also Read - Coronavirus Vaccination: इस देश ने कोविड-19 के लिए भारत में बनी एस्ट्राजेनेका के टीके को दी मंजूरी

जवाब: भारत बायोटेक की ओर से निर्मित कोरोना वैक्सीन का परीक्षण जयपुर में हो रहा है. इसमें इंजेक्शन के माध्यम से दवा का परीक्षण किया जा रहा है. शुरू में एक हजार लोगों पर यह ट्रायल किया जा रहा है. अब तक हमने तीन सौ लोगों को वैक्सीन लगाएं है. रिजल्ट काफी अच्छे है. Also Read - दिल्ली में कल से इन 81 स्थानों पर लगाए जाएंगे कोविड-19 के टीके, वैक्सीनेशन की तैयारियां हुईं पूरी, देखें लिस्ट

सवाल: कहा जाता है कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट हो सकते है? क्या साइड इफेक्ट अब तक सामने आए?

जवाब: देखिए, किसी भी वैक्सीन का साइड इफेक्ट हो सकता है. साइड इफेक्ट दो तरह के होते है एक नॉर्मल और दूसरा साइड इफेक्ट वो जिसमें वैक्सीन लगवाने वाले को गंभीर परेशानी हो. नॉर्मल साइड इफेक्ट में दर्द होना आदि शामिल है. जबकि गंभीर साइड इफेक्ट में वैक्सीन के अंदर बेस के कारण जहां वैक्सीन लगाया है उस जगह पर लाल दाना होना, बुखार आना, चक्कर आना, खुजली होना, हाथ-पैर या सिर में दर्द होना आदि शामिल है. अब तक हमने 300 लोगों को वैक्सीन लगाई है, लेकिन उनमें किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है.

सवाल: यदि किसी व्यक्ति को साइड इफेक्ट होता है तो उसके लिए किसकी जिम्मेदारी होगी?

जवाब: देखिए, दोनों डोज लेने के बाद हम सालभर तक इन लोगों की मॉनिटरिंग करेंगे टेलीफोन से. अभी तक कोई साइड इफेक्ट का मामला आया नहीं है. फिर भी अगर किसी व्यक्ति के साथ कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट से कोई नुकसान होता है तो उसमें एक करोड़ रुपए तक का बीमा प्रावधान किया गया है. मेडिकल बिलों के पुर्नभुगतान की भी व्यवस्था की गई है.

सवाल: पहली डोज के कितने दिन बाद दूसरी डोज दी जाती है और वैक्सीन लगाने के बाद व्यक्ति कितने दिन तक कोरोना वायरस से सुरक्षित रह सकता है?

जवाब: जब व्यक्ति वैक्सीन की पहली डोज लेता है तो उसके 28 दिन बाद दूसरी डोज दी जाती है. इसमें एक दिन कम या ज्यादा हो सकता है. साथ ही वैक्सीन की सैकेंड डोज के एक माह बाद एंटीबॉडी लेवल बन जाता हैं. हम यह मानते है कि जिस व्यक्ति के वैक्सीन लग चुकी है वह कम से कम तीन से छह माह के लिए कोरोना से सुरक्षित रह सकता है। चूंकि यह वायरस नया है, ऐसी स्थिति में अभी पूरी तरह समय का सही आंकलन संभव नहीं है.

सवाल: कोरोना वैक्सीन यदि सफल होती है तो क्या यह दूसरे गंभीर वायरस से भी लोगों को बचा सकेगी?

जवाब: अभी इस स्थिति में यह कहना काफी कठिन है. यह शोध का विषय है। आगे जाकर इन चीजों पर भी शोध होगा.

सवाल: अभी तक किस-किस उम्र के व्यक्तियों ने वैक्सीन लगवाई है? कम से कम उम्र कितनी होनी चाहिए?

जवाब: अभी तक जयपुर में हमने 70 साल तक की एज ग्रुप के लोगों को कोरोना वैक्सीन दी है. जो भी महिला या पुरुष 18 वर्ष से कम हो उन्हें ट्रायल में शामिल किया जा सकता है. ट्रायल से पहले हम उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री चेक करते है. पूर्व में कोरोना पॉजिटिव हुए व्यक्ति के साथ ही शुगर, हाइपर टेंशन जैसे मरीजों को ट्रायल में शामिल नहीं कर रहे है.

सवाल: क्या लगता है कि कब तक ये कोरोना वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगी?

जवाब: देखिए, वैसे तो यह सरकार के लेवल पर डिसाइड होगा. फिर भी जहां तक मेरा अनुमान है कि मार्च के आसपास यह वैक्सीन आ सकती है. साथ ही कुछ कंपनियों ने इमरजेंसी में इस वैक्सीन की अनुमति भी मांगी है. यदि ये अनुमति मिलती है तो संभवत: कुछ जल्दी लोगों को लगाई जा सकेगी.

सवाल: आम लोगों से क्या अपील करना चाहेंगे?

जवाब: समाज के लोगों से यही अपील करना चाहूंगा कि वे ज्यादा से ज्यादा ट्रायल का हिस्सा बनें. समाज के अलग—अलग क्षेत्रों से लोग आएंगे तो एक अच्छा डाटा कलेक्ट होगा और यह हमारे लिए काफी फायदेमंद होगा.