नई दिल्ली: देश अभी कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है. कोरोना वायरस के मद्देनजर देश में 25 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद लगातार देश की आर्थिक स्थिति में गिरावट दर्ज की जा रही थी. ऐसे में किसानों व मजदूरों को लेकर सरकार समय समय पर अपनी चिंता जाहिर करती रही साथ ही उनके लिए कई छूट व घोषणाएं भी की गई. लेकिन कोरोना महामारी के बीच एक और आफत देश में कदम रख चुका है. हालांकि यह कोई महामारी नहीं बल्कि रेगिस्तानी टिड्डियों (Desert locusts) का हमला है. जी हां, राजस्थान के जयपुर में सोमवार के दिन टिड्डियों के दल का हमला देखने को मिला. यहां राजपार्क, ट्रांसपोर्ट नगर और परकोटे क्षेत्र में टिड्डियों का आतंक देखने को मिला. टिड्डियों के आतंक से राजस्थान के लगभग 16 जिले प्रभावित हैं. राज्य कृषि विभाग की माने तो टिड्डियों का राज्य में 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में प्रभाव हो चुका है. बता दें कि पिछले साल भी टिड्डियों का ऐसा ही हमला देखने को मिला था. उस वक्त करीब 7 लाख हेक्टेयर में उगाए गए फसलों को टिड्डियों ने नष्ट कर दिया था. Also Read - बगावत पर अमादा सचिन पायलट! CM से मिले मंत्री-MLA, बोले- राजस्थान में अशोक गहलोत ही हैं कांग्रेस, हम BJP को...

बता दें कि इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक छत के उपर भारी संख्या टिड्डियों का जमावड़ा लगा हुआ है. यही नहीं जयपुर सहित 16 अन्य जिलों में इन टिड्डियों की तमाम तस्वीरें सामने आ रही हैं. पिछले साल के वाक्ये के बाद टिड्डियों का इस साल भी आतंक कृषि विभाग के लिए चिंता का सबब बन चुका है. कृषि विभाग की मानें तो टिड्डियों का झुंड भोजन की तलाश में व गर्मी से बचने के लिए राज्य के दक्षिण और पूर्व दिशा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. Also Read - सचिन पायलट से संपर्क साधना हुआ मुश्किल, राजस्थान में सरकार बचाने की जुगत में जुटी कांग्रेस

राज्य कृषि आयुक्त ने इस मामले पर कहा- चूंकि यह किसानी का मौसम नहीं है इस कारण फसल भी बहुत कम है. यही कारण हैं के टिड्डियों का झुंड तेजी से अन्य क्षेत्रों में भोजन की तलाश में बढ़ रहे हैं. बता दें कि टिड्डियों के आतंक को लेकर अधिकारियों का कहना है कि हालांकि पहले टिड्डियों का ब्रीडिंग सेंटर अफ्रीकन देश हुआ करते थे. वहां से इन्हें भारत आने में काफी वक्त लगता था लेकिन पिछले साल इन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा पर अपना ब्रीडिंग सेंटर बनाया. इस बाबत पाकिस्तान सरकार ने इन टिड्डियों पर नियंत्रण पाने को लेकर किसी तरह का प्रयास नहीं किया. इस कारण लगातार पिछले ही साल से टिड्डियों के इस तरह के हमले देखने को मिल रहे हैं.

टिड्डियां क्या हैं?

अगर रेगिस्तानी टिड्डियों की बात करें तो इनका प्रभाव सीधे तौर पर किसानी व फसलों से जुड़े कामों पर देखने को मिलता है. ये फसलों को नष्ट करने के लिए जाने जाते है. देश के कई हिस्सों में हमें टिड्डी देखने को मिलते हैं या कई बार इनके झुंड देखने को मिलते हैं लेकिन रेगिस्तानी टिड्डी इन अन्य भागों में दिखने वाले टिड्डियों से थोड़ा अलग होते हैं. या यूं कहें कि ये टिड्डियों की एक अलग प्रजाति ही हैं. आम टिड्डियों के मुकाबले रेगिस्तानी टिड्डे फसलों को कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. कई देशों में टिड्डों के आतंक को टिड्डे प्लेग का भी नाम दिया गया है. इसको किसानी से जुड़े मामलों में प्लेग की संज्ञा दी गई है. जब टिड्डियों का विशाल झुंड की महाद्वीपों में फैल जाता है तो इसे प्लेग का नाम दे दिया जाता है. AFO के अनुसार टिड्डों का प्लेग दरअसल इनकी प्रजाति के सबसे विनाशकारी टिड्डों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ये आसानी से धरती के 20 प्रतिशत भू भाग को प्रभावित करने में सक्ष्म होते हैं. इस कारण रेगिस्तानी टिड्डों को हल्के में लेना खाद्य सुरक्षा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.

टिड्डियों का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

रेगिस्तानी टिड्डे वैसे तो शुष्क व अर्ध शुष्क रेगसितानी क्षेत्रों में तक ही सीमित होते हैं लेकिन अगर हमले या ब्रीडिंग के दौरान ये लगभग 30-60 देशों में भी जा सकते हैं. इस दौरान वे फसलों व खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का मुख्य कारण बन जाते हैं क्योंकि ये अपने वजन के बराबर प्रतिदिन भोजन कर सकते हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि 1 वर्ग किलोमीटर में उपजे खाद्य से 35 हजार लोगों की पूर्ति की जा सकती है लेकिन ये टिड्डे झुंड में 35 हजार लोगों के बराबर ही फसलों को खाने की क्षमता रखते हैं. इन कीड़ों पर समय पर कार्रवाई न करने पर यह फसलों व वनस्पति पर काफी प्रभाव डालते हैं. ऐसे में अगर फसलों और वनस्पतियों को नुकसान होगा तो जाहिर सी बात है कि देश में फसलों से जुड़े खाद्य पदार्थों पर महंगाई सहित भूखमरी जैसी स्थिति भी आ सकती है.