Rajasthan: राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया है कि अब राज्य में  किसी भी बाहरी व्यक्ति को सरकारी नौकरी और चुनावों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. कोर्ट की एक एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया है कि दूसरे राज्य से विवाह करके आने वाली महिला या प्रवासी प्रदेश में सरकारी नौकरी और चुनाव में आरक्षित सीट (Reserved Seat) के लिए दावेदारी नहीं कर सकते हैं. वे राजस्थान और मूल राज्य में एक ही आरक्षित वर्ग की सूची में भी क्यों न शामिल हो.Also Read - Rajasthan Cabinet Expansion: राजस्थान कैबिनेट का 28 जुलाई को हो सकता है विस्तार, अजय माकन ने कही ये बात...

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि आरक्षित वर्ग के प्रवासियों को अन्य सरकारी लाभ के लिए प्रमाण पत्र (Certificate) जारी हो सकते है. लेकिन संबंधित विभाग इन प्रमाण पत्रों पर यह स्पष्ट अंकित करेगा कि यह प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी या चुनाव लड़ने के लिए मान्य नहीं होगा. Also Read - Electric Vehicle Policy: महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों की तर्ज पर राजस्थान में जल्द आएगी इलेक्ट्रिक वाहन नीति

एकलपीठ ने अपने फैसले में साफ किया है कि ऐसी महिलाएं जो अन्य राज्य से राजस्थान में शादी करके आई हैं, अथवा ऐसे लोग जो माइग्रेट होकर प्रदेश में रह रहे हैं. उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी सक्षम प्राधिकारी कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं. Also Read - Electric Vehicle Subsidy: इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सरकार दे रही है बंपर सब्सिडी, जानिए- कैसे लें फायदा?

इसमें किसी भी प्रकार के भ्रम से बचने, प्रमाण पत्र के दुरुपयोग को रोकने के लिए उस पर एक नोट अंकित किया जाना चाहिए, जिसमें लिखा हो कि इस प्रमाण पत्र के आधार पर, विस्थापित व्यक्ति सरकारी नौकरी और आरक्षण के लाभ का दावा करने का हकदार नहीं होगा. यह प्रमाण पत्र सरकारी योजनाओं में प्रवासी व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध लाभों के दावे के सीमित उद्देश्य के लिए जारी किया गया है.