नई दिल्ली: राजस्थान विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है. राज्य में सात दिसंबर को मतदान होगा और नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे. यहां बीजेपी की सरकार है. पिछले 20 सालों से राजस्थान में कोई भी सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उम्मीद है कि इस बार ये परंपरा बदलेगी, वहीं कांग्रेस इस उम्मीद में है कि यह परंपरा कायम रहेगी. 1998 के बाद से राज्य में एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस की सरकार बनती आ रही है. दोनों में से किसी भी पार्टी ने लगातार दो बार सरकार नहीं बनाई. Also Read - संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा- हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने को BJP-JJP विधायकों पर डालें दबाव

2013 के विधानसभा चुनाव में 163 सीटें जीतने वाली राजे ने इतिहास रच दिया था. लेकिन उपचुनावों में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है. फरवरी में हुए लोकसभा उपचुनाव में पार्टी अलवर और अजमेर सीट गंवा चुकी है. उपचुनावों में मिली हार के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और कुछ हद तक डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है. Also Read - राजस्थान में भी लगेगा लॉकडाउन? सीएम गहलोत ने दी चेतावनी, 'कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें लोग, नहीं तो..'

राज्य बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया गया है. वहीं पार्टी राष्ट्रीय पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के दो विधायकों को साथ लाने में कामयाब रही है. किरोड़ीलाल मीना को बीजेपी टिकट पर राज्य सभा के लिए चुना गया. पूर्वी राजस्थान में अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच प्रभाव डालने के लिए जाने जाने वाली मीना ने 2008 में बीजेपी छोड़ दी थी और 2013 में एनपीपी उम्मीदवार के रूप में जीता था. Also Read - क्या उत्तराखंड में सीएम को बदला जाएगा? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कही ये बात

वसुंधरा राजे पिछले 2 महीने से राज्य में राजस्थान गौरव यात्रा कर रही हैं और अपने काम गिना रही हैं. वहीं गौरव यात्रा की काट के लिए कांग्रेस ने संकल्प यात्रा शुरू की है. किसानों की आत्महत्या, सरकारी कर्मचारियों में असंतोष, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजे को घेर रही है.

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस सचिन पायलट और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के खेमे में बंटी हुई है. हाल ही में राजस्थान में रैली करने पहुंचे अमित शाह का कहना है कि कांग्रेस के पास न नेता हैं न नीति. हालांकि राहुल गांधी बार बार राजस्थान के दौरे पर जा रहे हैं और बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस के नेताओं को एकजुट रहने की सलाह दे रहे हैं.

पिछले चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने एक तरफा जीत हासिल की थी. उसे 81.5 फीसदी वोटों के साथ कुल 163 सीटों पर जीत मिली थी. इसके बाद दूसरे नंबर कांग्रेस थी, जिसे 10.5 फीसदी वोट शेयर के साथ सिर्फ 21 सीटें मिली थी. चौंकाने वाली बात रही थी कि राज्य में 7 निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे. नेशनल पिपल पार्टी को 4 और बीएसपी को तीन सीटें मिली थी. एनयूजेडपी को भी 2 सीटें मिली थी.