जैसलमेर: राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच राज्‍य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है, उसे बंद करवाएं. सीएम गहलोत ने कहा, प्रधानमंत्री को राजस्थान में चल रहे ‘तमाशा’ को रोकना चाहिए. यहां हॉर्स ट्रेडिंग की दर बढ़ी है. क्या है ‘तमाशा’?. Also Read - बिहार चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं देवेंद्र फडणवीस, क्‍या सुशांत सिंह राजपूत फैक्‍टर काम करेगा

सीएम गहलोत ने शनिवार को आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी सरकार को गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल खेल रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजस्थान में चल रहे इस ‘तमाशे’ को बंद करवाने की अपील की. Also Read - PM नरेंद्र मोदी का नया रिकॉर्ड, सबसे लंबे समय तक रहने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने

गहलोत ने जैसलमेर में मीडियाकर्मियों से कहा, ”दुर्भाग्य से इस बार भाजपा का प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त का खेल बहुत बड़ा है. वह कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश का प्रयोग यहां कर रही है. पूरा गृह मंत्रालय इस काम में लग चुका है.” Also Read - राजस्थान: विश्वास मत लाएगी कांग्रेस, अशोक गहलोत बोले- हम 'इनके' बिना भी बहुमत में थे, लेकिन अपने तो अपने होते हैं

मुख्‍यमंत्री ने कहा, ”…हमें किसी की परवाह नहीं. हमें लोकतंत्र की परवाह है. हमारी लड़ाई किसी से नहीं है. (हमारी) विचारधारा, नीतियों एवं कार्यक्रमों की लड़ाई है. लड़ाई यह नहीं होती कि आप चुनी हुई सरकार को गिरा दें. हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है.”

सीएम गहलोत ने कहा, ”मोदी को प्रधानमंत्री के रूप दूसरी बार जनता ने मौका दिया, जो बड़ी बात है. उन्हें चाहिए कि राजस्थान में जो कुछ तमाशा हो रहा है उसे बंद करवाएं.”

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा सरकार के खिलाफ ट्वीट किए जाने के बारे में गहलोत ने कहा कि सिंह तो अपनी झेंप मिटा रहे हैं, जबकि आडियो टेप मामले में उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए.

उनके नेतृत्व से नाराज होकर अलग होने वाले सचिन पायलट एवं 18 अन्य कांग्रेस विधायकों की वापसी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला पार्टी आलाकमान को करना है और अगर आलाकमान उन्हें माफ करता है तो वे भी बागियों को गले लगा लेंगे.

बता दें कि राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान में विधायकों को तोड़ने की आशंका के बीच कांग्रेस एवं उसके समर्थक विधायकों को शुक्रवार को राजधानी जयपुर से दूर सीमावर्ती शहर जैसलमेर स्थानांतरित कर दिया गया.