नई दिल्ली. राजस्थान में आठवीं कक्षा की एक किताब में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के बारे में अनाप-शनाप बातें पढ़ाई जा रही हैं. ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ कहने वाले तिलक के बारे में किताब में कहा गया है कि बाल गंगाधर तिलक ‘आतंकवाद के जनक’ थे. हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए में छपी खबर के अनुसार, ‘किताब में कहा गया है कि बाल गंगाधर तिलक महाराष्ट्र में छपने वाले अपने ‘मराठा’ और ‘केसरी’ नाम के अखबारों में अंग्रेज सरकार की ज्यादतियों की मुखालफत करने वाले स्वंतत्रता सेनानियों के खिलाफ में लिखा करते थे.’ तिलक के बारे ऐसी बातों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर विरोध जताया है. दिग्विजय सिंह ने टि्वटर पर किए गए अपने पोस्ट में इस किताब की लाइनों को अंडरलाइन करते हुए राजस्थान के सीएम वसुंधरा राजे से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. Also Read - राजस्‍थान सरकार का कृषि संशोधन बिल, किसान उत्‍पीड़न पर 3 से 7 साल की कैद, 5 लाख का जुर्माना

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से थे तिलक
बाल गंगाधर तिलक को महाराष्ट्र के समाज-परिवर्तकों के रूप में जाना जाता है. तत्कालीन अंग्रेज सरकार के खिलाफ स्वाधीनता की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले बाल गंगाधर तिलक ने ही पहली बार स्वतंत्रता का नारा दिया था, ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे हम लेकर रहेंगे.’ महाराष्ट्र में गणेश पूजा की परंपरा शुरू कराने वालों में भी तिलक को सबसे आगे की पंक्तियों में रखा जाता है. गणेश पूजा के बहाने समाज को एकजुट करने और स्वाधीनता का संदेश देने वालों में बाल गंगाधर तिलक के योगदान को देशवासी गर्व के साथ याद करते हैं. लेकिन राजस्थान में पढ़ाई जा रही आठवीं कक्षा की किताब में तिलक के खिलाफ लिखी गई बातों को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने बच्चों की कक्षा में इस तरह के किताब पढ़ाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की है.

एचआरडी मंत्रालय से ध्यान देने का किया अनुरोध
सोशल मीडिया साइट टि्वटर पर कई लोगों ने किताब के पन्ने के साथ अपने पोस्ट करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ के प्रति दुख जताया है. कई यूजर्स ने अपने पोस्ट्स के साथ एचआरडी मंत्रालय और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का हैशटैग डालते हुए तत्काल मामले के दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है. एक यूजर ने राजस्थान बोर्ड की आठवीं कक्षा की किताब के प्रकाशक को यूपी के मथुरा का बताते हुए घटना पर अफसोस जताया है. वहीं कई लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े तथ्यों के साथ छेड़छाड़ को गंभीर मसला बताते हुए इसे वर्तमान राजनीतिक हालात से जोड़कर अपने पोस्ट किए हैं. सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने पोस्ट्स में लिखा है कि तिलक जैसे स्वतंत्रता सेनानी के बारे में ऐसे भ्रामक तथ्यों का प्रचार-प्रसार स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को आजादी की लड़ाई से संबंधित गलत जानकारी देगा.