नई दिल्ली. पाकिस्तान की सीमा से लगभग 200 किलोमीटर दूर राजस्थान के पोखरण में आजकल विधानसभा चुनाव के बहाने दो धार्मिक नेता सियासी जंग लड़ रहे हैं. पोखरण को भारत के परमाण्विक परीक्षण केंद्र के तौर पर जाना जाता है. जाहिर है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी यहां के हालात किसी ‘एटमी जंग’ यानी परमाणु युद्ध से कम नहीं हैं. भारत के सबसे बड़े रेगिस्तान थार का यह इलाका इन दिनों धार्मिक पृष्ठभूमि से आने वाले कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों की वजह से सरगर्म है. यहां से भाजपा के उम्मीदवार जहां संत महंत प्रताप पुरी विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने मुस्लिम धार्मिक गुरु गाजी फकीर के बेटे सालेह मोहम्मद को मैदान में उतारा है. बता दें कि राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटों पर कुल 2,294 प्रत्याशी चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. राज्य के 4.7 करोड़ से अधिक मतदाता आगामी 7 दिसंबर को इन प्रत्याशियों के राजनीतिक भाग्य का फैसला करेंगे.

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कांग्रेस प्रत्याशी को सिंधी मुस्लिमों का भरोसा
प्रदेश में इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच की सियासी लड़ाई प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है. पोखरण में दोनों दलों की इस जंग का असर साफ देखा जा सकता है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, आगामी 26 नवंबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पोखरण का दौरा करने वाले हैं. वे वर्ष 2013 में यहां से विधानसभा का चुनाव हारने वाले मौजूदा प्रत्याशी सालेह मोहम्मद के समर्थन में वोटरों का दिल जीतने की कोशिश करेंगे. सालेह को अपने पिता गाजी फकीर के असंख्य अनुयायी, सिंधी मुस्लिमों के समर्थन का भरोसा है. इस समाज पर फकीर का असर व्यापक है. हालांकि पिछली बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार शैतान सिंह के सामने सालेह मोहम्मद की नहीं चल पाई, लेकिन इस बार देश के माहौल को देखते हुए सालेह को भरोसा है कि वोटर उनके पिता के ‘आईने’ में उन पर भरोसा जताएंगे. यह गौरतलब है कि सालेह ने वर्ष 2008 के चुनाव में यहीं से जीत दर्ज की थी. इसलिए 5 साल बाद क्या एक बार उनका जादू फिर चलेगा, यह गौर करने वाली बात होगी.

राज्य की 200 विधानसभा सीटों के मुकाबले 2,294 उम्मीदवार मैदान में

भाजपा उम्मीदवार अपने अनुयायियों के भरोसे
पोखरण से भारतीय जनता पार्टी ने बाड़मेर के मशहूर संत महंत प्रताप पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. राजपूत परिवार से आने वाले महंत प्रताप पुरी हिंदुत्व के एजेंडे के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं. बाड़मेर और जैसलमेर के इलाकों में मौजूद असंख्य हिन्दू वोटरों पर उनका प्रभाव देखते हुए उन्हें इस क्षेत्र में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरह फायरब्रांड-नेता के तौर पर जाना जाता है. खासकर, राजपूत वोटरों पर उनके प्रभाव को देखते हुए भाजपा को उम्मीद है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ बने माहौल के बावजूद, पार्टी को पोखरण सीट पर महंत प्रताप पुरी की वजह से जीत हासिल हो सकती है. इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद हिंदू वोटरों की तादाद को देखते हुए भाजपा का यह भरोसा लाजिमी है. हालांकि विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या होगा, यह तो 11 दिसंबर को मतगणना के बाद ही सामने आना है.

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दोनों दलों के प्रत्याशियों ने खींच रखी है प्रत्यंचा
विधानसभा चुनाव के बरक्स भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के प्रत्याशी इन दिनों एक-दूसरे पर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. अखबार के अनुसार, कांग्रेस प्रत्याशी सालेह मोहम्मद का कहना है कि भाजपा पोखरण के इलाके में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बिगाड़ना चाहती है. वह भेदभावपूर्ण राजनीति से चुनाव जीतना चाहती है. लेकिन कांग्रेस इस सियासी चाल को सफल नहीं होने देगी. कांग्रेस को हिंदू-मुस्लिम, दोनों समुदायों के वोट मिलेंगे. इधर, भाजपा के उम्मीदवार महंत प्रताप पुरी ऐसा ही आरोप कांग्रेस पर लगाते हैं. अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी लड़ाई को सांप्रदायिक रंग देना चाहती है, लेकिन मैं इस साजिश को सफल नहीं होने दूंगा. मैं लोगों के कल्याण के लिए पिछले कई वर्षों से काम कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा.