अलवर: भारत में तथाकथित गो रक्षकों का ‘ग्राउंड जीरो’ माना जाने वाला राजस्थान का अलवर में समस्‍याओं की कमी नहीं है. यहां पीने के पानी की कमी है, स्वच्छता का अभाव है, लेकिन तमाम समस्याओं से जूझते यहां के नागरिकों के लिये सबसे बड़ी चुनौती शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी है. हालत ये है कि वे आगामी विधानसभा चुनावों में उसी प्रत्‍याशी के लिए मतदान करना चाहते हैं जो इस समस्या का समाधान तलाश कर सके.Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

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प्रदेश में सात दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी रंग हर तरफ नजर आ रहा है.शहर के किसी भी इलाके में निकल जाइए सड़क के किनारे कूड़े के ढेर और वहां मंडराती आवारा गायों, कुत्तों और सूअरों का दृश्य आम बात है. शहर में साढ़े चार लाख निवासी हैं और मतदाताओं की संख्या दो लाख 45 हजार है. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

राज्य के पूर्वी हिस्से में स्थित अलवर की सीमा हरियाणा से लगती है और यह मेवात क्षेत्र का एक हिस्सा बनाता है जहां मेव मुस्लिम समुदाय की काफी आबादी है. अलवर शहर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ है और लगभग उतनी ही दूरी पर बहरोड़ हैं. ये दोनों ही विधानसभा क्षेत्र गो-तस्करी के शक में मुस्लिम व्यक्तियों की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किये जाने की घटनाओं के बाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर दर्ज हो गए.

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पहलू खान की पिछले साल अप्रैल में बहरोड़ में कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी जबकि इस साल जुलाई में बहरोड़ में ही रकबर खान की भी कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. अकसर विवादित बयान देने वाले कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी नेता ज्ञान देव आहूजा को रामगढ़ से भाजपा का टिकट नहीं मिला, जहां मेव आबादी ज्यादा है. भाजपा ने रामगढ़ से सुखवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस ने साफिया जुबेर खान पर दांव लगाया है.

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बहरोड़ में यादव सबसे प्रभावी समुदाय हैं और दोनों दलों ने यहां से यादव उम्मीदवार उतारा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पीट-पीटकर हत्या के मुद्दे की यहां कोई अहमियत नहीं है. स्थानीय निवासी अश्विनी यादव कहते हैं, ‘‘लोग डकैती और हत्याओं जैसे दूसरे अपराधों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं. चुनाव प्रचार के दौरान पीट-पीटकर हत्या का जिक्र तक नहीं किया गया.’’

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एक और स्थानीय निवासी डॉ. एस सी मित्तल इस बात से सहमत हैं कि गाय, कुत्ते और सूअर समेत आवारा पशु बड़ी समस्या हैं और इसके अलावा स्वच्छता भी बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि लोगों की चिंताओं को दूर करने में स्थानीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं. अलवर शहर से कांग्रेस उमीदवार श्वेता सैनी ने कहा कि इस सीट पर भाजपा 10 साल से काबिज है लेकिन कोई काम नहीं हुआ है.