नई दिल्‍ली: राजस्थान पुलिस की विशेष शाखा (एटीएस) ने जयपुर एयरपोर्ट पर आज एक यात्री को विदेशी मुद्रा की खेप के साथ पकड़ा है. एटीएस की सूचना पर कस्टम विभाग ने ये कार्रवाई की है. राजस्थान एटीएस के अतिरिक्त महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए व्यक्ति का नाम अनिल जैन है, जो जयपुर के मानसरोवर में रहता है. विदेशी मुद्रा की इस खेप को वह जयपुर से दुबई ले जा रहा था. उसके पास से सऊदी अरब की रियाल, बांग्लादेश की टका मुद्रा और बहरीन की मुद्रा बरामद की गई है. पूछताछ में सामने आया कि विदेशी मुद्रा की खेप हवाला कारोबार के जरिए विदेशों में ले जाई जा रही थी. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी विदेशी मुद्रा को जयपुर से विदेशों में हवाई यात्रा के जरिए ले जा चुका है.

एटीएस ने पूछताछ के बाद अनिल जैन को कस्टम विभाग को सौंप दिया है, जहां उससे पूछताछ जारी है. जानकारी में आया है कि अनिल का बेटा अर्पित जैन फिलहाल जेल में है. जो कुछ दिनों पहले करीब 96 लाख रुपए की हवाला रकम के साथ पकड़ा गया था. एटीएस ने जयपुर के मानसरोवर निवासी अनिल कुमार जैन को विदेशी मुद्रा के साथ जयपुर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया. आरोपी इस विदेशी मुद्रा को यहां से दुबई ले जाने की तैयारी में था. एटीएस ने इस विदेशी मुद्रा का आतंकवादी गतिविधियो में इस्तेमाल होने की संभावना भी जताई है जिसे लेकर ATS अपनी जांच करेगा.

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कैसे मिली ATS को सूचना
दरअसल ATS को एक आम आदमी की तरफ से इस संबंध में शिकायत दी गई थी कि अनिल जैन बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा लेकर दुबई जाने की फिराक में है. सुचना की तस्दीक करते हुए एटीएस ने आज इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए जयपुर एयरपोर्ट से अनिल जैन को दबोच लिया, जिससे करीब 50 लाख रुपयों की विदेशी मुद्रा बरामद की गई है. ATS ने इस मामले में अनिल जैन से पूछताछ की जिसके बाद उन्होंने इस मामले को एयरपोर्ट विंग और कस्टम विभाग को सौंप दिया. इस मामले में अब आयकर विभाग और कस्टम विभाग ने भी आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल जैन इससे पहले भी कई बार विदेशी मुद्रा अपने साथ कई देशों में ले जा चुके हैं. आयकर विभाग और कस्टम विभाग मामले में हवाला कारोबार के बारे में भी पूछताछ कर रहे हैं.

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पर्ची के जरिये चलता है हवाला कारोबार और फिर दिखाना होता है व्हाट्सएप
अब से पहले पकड़े गये हवाला कारोबारियों का कैश का मूल स्थान दिल्ली में में था. कैश को दिल्ली से इधर-उधर ले जाने के लिए भिलवाड़ा और उदयपुर दो मुख्य प्वाइंट थे. उनके काम करने का तरीका बेहद अनोखा था. जिस शख्स ने कैश से भरा बैग उठाया था, वह अपनी मोबाइल फोन पर एक खास दस्तखत को पहचान के तौर पर दिखाता था. कैश की डिलीवरी करने वाले शख्स और इसे लेने वाले यानी रिसीवर के पास भी इसी तरह के दस्तखत थे. इस दस्तखत को वॉट्सअप मेंसेजर के जरिये हवाला ऑपरेटरों के गिरोह की तरफ से भेजा जाता था. आसान शब्दों में कहें, तो इसे ‘चिन्ह देना’ कहा जाता है. दस्तखत मिलान के इस सिस्टम के कारण इस नेटवर्क में सक्रिय लोगों के लिए एक-दूसरे की पहचान जाहिर करने की कोई जरूरत थी. सिर्फ दस्तखत वाला मेसेज ही पहचान सुनिश्चित करने के लिए काफी था.कैश तस्कर को आखिर में मार्च में एक प्राइवेट बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया और उसे आयकर विभाग को सौंप दिया गया. यह कैश तस्कर उस हवाला नेटवर्क का हिस्सा था, जो चार राज्यों में इस तरह की हरकत को अंजाम देने में सक्रिय था. चूंकि वे ऊंचे मूल्य वाले नोटों (मुख्य तौर पर 2,000 के नोट) के अवैध कारोबार में संलिप्त थे, लिहाजा इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि इस गिरोह के अहम लोग अब भी पकड़ से बाहर हैं.’ऑपरेशन कुबेर’ का सवाल है, तो इससे हवाला नेटवर्क के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर काफी हद तक सुराग मिला है और जांच टीम इस गोरखधंधे के बारीक पहुलओं के बारे में पता लगाने को लेकर काम कर रही है.

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राजस्थान में हवाला कारोबार का गढ़ शेखावाटी का फतेहपुर कस्बा
हवाला कारोबार का गढ़ माने जाने वाले राजस्थान के शेखावाटी का फतेहपुर कस्बा भी इस मामले में कुख्यात है. यहां से देश ही नहीं विदेश में भी बड़े पैमाने पर कालाधन इधर-उधर किया जाता है. एक अनुमान के मुताबिक शेखावाटी में हर माह 250 करोड़ रुपए का हवाला होता है. अकेले फतेहपुर में हर सप्ताह दस करोड़ रुपए हवाला से आते हैं. यहां 100 से ज्यादा लोग और शेखावाटी में 500 लोग हवाला से जुड़े हैं. शेखावाटी और नागौर जिले के करीब 5 लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं. उनमें से 75 फीसदी लोग हवाला से ही रुपए घर भेजते हैं. खाड़ी देशों में काम करने वालों में अधिकांश मजदूर वर्ग के हैं और वे बैंकों की जटिल प्रक्रिया से दूर रहते हैं. वे अपनी कमाई का खुलासा करने और टैक्स देने से बचने के लिए भी हवाला का सहारा लेते हैं. आईएस के ऑपरेटिव जमील अहमद ने भी हवाला से ही रुपए आतंकियों तक पहुंचाए. हवाला से सोने के तस्करी में काफी मदद मिलती है. सोने के तस्कर हवाला से ही रुपए का लेन-देन करते हैं. इसके जरिए विदेश में या देश के किसी भी शहर में लाखों-करोड़ों रुपए का भुगतान कुछ घंटों में हो जाता है. भूमाफिया भी हवाला का सहारा लेते हैं. वे यहां जमीन का सौदा करते हैं और जमीन मालिक को अप्रवासी उनके गृह नगर कोलकाता, मुंबई, गुवाहाटी, हैदराबाद, बेंगलुरु या उड़ीसा में भुगतान कर देते हैं. रुपए इधर से उधर ले जाने में रिस्क कम होता है.शेखावाटी के कई लोग खाड़ी देशों में रहते हैं. इसलिए देशविरोधी और आतंकी संगठनों को पैर जमाने के लिए यहां मुफीद जमीन दिख रही है. दो साल पहले सीकर से पकड़े गए पांचों संदिग्ध युवक जयपुर से गिरफ्तार जीआईटी छात्र मारूफ उर्फ इब्राहीम से संपर्क में थे. मारूफ भी सीकर का रहने वाला है. उसने ही यहां आईएम का नेटवर्क तैयार किया. मारूफ ने उन्हें कुछ अन्य संदिग्ध लोगों से भी मिलवाया था.

किसे होता है हवाला से भुगतान
हवाला में किसी भी नोट के नंबर के आधार पर भुगतान किया जाता है. हवाला कारोबारी किसी नोट के नंबर स्थानीय व्यक्ति को बता देता है. यही नंबर वह दूसरे स्थान पर भुगतान लेने वाले व्यक्ति को बता देता है. यह नंबर बताते ही हवाला कारोबारी रुपए लेने आने वाले व्यक्ति को भुगतान कर देता है. हवाला में प्रति लाख पर निश्चित शुल्क वसूला जाता है. यह शुल्क प्रति लाख 300 रुपए से शुरू होता है, जो राशि और भुगतान करने की दूरी के हिसाब से बढ़ता जाता है.