नई दिल्‍ली/ जयपुर: राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले राज्‍यपाल कलराज मिश्र पर विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने का आरोप लगाया और जनता के राजभवन के घेराव की चेतावनी दी. इसके बाद सीएम विधायकों के साथ गवर्नर हाउस पहुंचे और फिर राज्‍यपाल से मुलाकात की. राजभवन परिसर के अंदर विधायक चार बसों से पहुंचे और वहां परिसर के ग्राउंड में बैठे दिखाई दिए. इस दौरान विधायकों ने नारेबाजी की. Also Read - विधानसभा चुनाव में करारी हार की समीक्षा के लिए समिति बनाएगी कांग्रेस

अशोक गहलोत सरकार के समर्थक विधायकों ने राजभवन में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए. मुख्यमंत्री गहलोत पहले जब राज्यपाल से मुलाकात कर रहे थे तो बाकी विधायक मंत्री बाहर लॉन में इंतजार कर रहे थे. इस दौरान इन विधायकों ने नारेबाजी की. विधायकों ने ‘हर जोर जुल्म की टक्कर में इंसाफ हमारा नारा है’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘अशोक गहलोत संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’, ‘अशोक गहलोत जिंदाबाद’ के नारे लगाए.

गहलोत खेमे के ये विधायक मुख्यमंत्री गहलोत की अगुवाई में ही राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने और विधानसभा का सत्र बुलाने का आग्रह करने राजभवन पहुंचे थे. इन विधायकों के साथ कांग्रेस सरकार के समर्थक निर्दलीय और अन्य विधायक भी राजभवन पहुंचे.

राज्‍यपाल से मिलने पहले सीएम गहलोत ने पत्रकारों से कहा था, ‘मैं कहना चाहूंगा महामहिम राज्यपाल से कि हम सब लोग आ रहे हैं एक साथ राजभवन में. उनसे सामूहिक आग्रह करेंगे कि आप किसी दबाव में नहीं आएं. आपका संवैधानिक पद है. शपथ ली हुई है. अंतरात्मा के आधार पर, शपथ की जो भावना है उसके आधार पर फैसला करें. वरना हो सकता है, पूरे प्रदेश की जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.’

दरअसल राज्‍यपाल कोरोना संकट के चलते विधानसभा सत्र बुलाने से इनकार कर चुके हैं.

बता दें कि मुख्‍यमंत्री ने हाईकोर्ट से सचिन पायलट खेमे के विधायकों की याचिका पर स्‍पीकर को लेकर यथास्‍थ‍िति बननाए रखने के लिए कहा. वि‍धानसभा अध्यक्ष के नोटिसों पर अदालत ने यथास्थिति बरकरार रखने का दिया आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय ने सचिन पायलट समेत 19 बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा भेजे गए अयोग्यता के नोटिसों पर यथास्थिति बरकरार रखने का शुक्रवार को आदेश दिया. इसके बाद मुख्‍यमंत्री होटल में ठहरे अपने विधायकों के बीच पहुंचे और राज्‍यपाल पर दबाव होने की बात कही.

राज्‍यपाल से मिलने से जाने के पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज शुक्रवार को कहा कि सरकार के आग्रह के बावजूद ‘ऊपर से दबाव’ के कारण राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे हैं.

ऊपर से दबाव के कारण राज्यपाल अभी विधानसभा सत्र बुलाने के लिए निर्देश नहीं दे रहे हैं
गहलोत ने कहा, ‘हमारा मानना है कि ऊपर से दबाव के कारण वह (राज्यपाल) अभी विधानसभा सत्र बुलाने के लिए निर्देश नहीं दे रहे हैं. इस बात का हमें बहुत दुख है. जबकि हम सत्र बुलाना जाना चाहते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘कैबिनेट के फैसले के बाद हमने माननीय राज्यपाल महोदय को पत्र लिखकर आग्रह किया कि हम चाहते हैं कि विधानसभा का सत्र बुलाएं और वहां राजनीतिक हालात, कोरोना व लॉकडाउन के बाद के आर्थिक हालात पर चर्चा हो. हमें उम्मीद थी कि वह रात को ही विधानसभा सत्र बुलाने का आदेश जारी कर देंगे. रात भर इंतजार किया लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया.’

राज्यपाल अविलंब फैसला करें
गहलोत ने कहा, ‘हम विधानसभा सत्र बुलाने को तैयार हैं… अभी राज्यपाल से टेलीफोन पर बातचीत हुई मैंने फिर आग्रह किया कि आपका संवैधानिक पद है, जिसकी बहुत गरिमा होती है उसके आधार पर अविलंब फैसला करें.विधानसभा सत्र हम सोमवार से शुरू करना चाहते हैं जहां ‘दूध का दूध पानी का पानी’ हो जाएगा. पूरा देश व प्रदेश देखेगा.’

यह पूरा खेल भाजपा, उसके नेताओं का षडयंत्र है
गहलोत ने कहा, ‘जब मैं बार-बार कह रहा हूं कि हमारे पास स्पष्ट बहुमत है, हमें कोई दिक्कत नहीं है, चिंता हमें होनी चाहिए सरकार हम चला रहे हैं इसके बावजूद भी परेशान वे हो रहे हैं.’ असंतुष्ट विधायकों के हरियाणा में रुके होने का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, ‘यह पूरा खेल भाजपा, उसके नेताओं का षडयंत्र है. जैसा उन्होंने कनार्टक, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में किया. राजस्थान में भी करना चाहते हैं. राजस्थान में पूरे प्रदेश की जनता, पूरे विधायक हमारे साथ हैं.’

जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.’
गहलोत ने कहा, ‘मैं कहना चाहूंगा महामहिम राज्यपाल से कि हम सब लोग आ रहे हैं एक साथ राजभवन में. उनसे सामूहिक आग्रह करेंगे कि आप किसी दबाव में नहीं आएं. आपका संवैधानिक पद है. शपथ ली हुई है. अंतरात्मा के आधार पर, शपथ की जो भावना है उसके आधार पर फैसला करें. वरना हो सकता है, पूरे प्रदेश की जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.’