जोधपुर. राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. लेकिन जोधपुर संभाग के छह जिलों में बागियों ने दोनों पार्टियों के लिए सिरदर्दी पैदा कर दी है. जोधपुर वही शहर है जहां पर नामचीन साहित्यकार और कहानीकार विजयदान देथा (Vijaydan Detha) उर्फ ‘बिज्जी’ का जन्म हुआ. बिज्जी की कहानियां पूरे राजस्थान में पढ़ी जाती है. सरल और सहज भाषा में कहानियां लिखने वाले बिज्जी जीवनभर राजस्थान में ही रहे. वे बाहर नहीं गए, और यहीं की लोक-संस्कृति को देख-समझकर उन्होंने कहानियां लिखीं. कहानियां भी ऐसी कि रबीन्द्र नाथ टैगोर के बाद बिज्जी पहले ऐसे भारतीय थे, जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. वहीं, उनकी लिखी कहानियों पर नाटक बने और फिल्में बनीं.

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अविभाजित मध्यप्रदेश के मशहूर नाटककार हबीब तनवीर ने बिज्जी की कहानी ‘चरणदास चोर’ को नाटक के रूप में मंचित किया. इस नाटक की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि देश के कई शहरों में इसके 20 हजार से ज्यादा शो किए गए. बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान और एक्ट्रेस रानी मुखर्जी के साथ फिल्मकार अमोल पालेकर ने ‘पहेली’ फिल्म बनाई. इससे पहले विजयदान देथा की ही कहानी पर एक और फिल्म भी बन चुकी है. बिज्जी की कहानियों की यह लोकप्रियता सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में उनकी कहानियों के प्रशंसक हैं. उनकी कहानी ‘दुविधा’ (जिस पर ‘पहेली’ फिल्म बनी) एक महिला की गाथा थी, जिसमें उसे अपने पति या भूत के बीच किसी एक का चुनाव करना था.

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बिज्जी की कहानी के संदर्भ में देखें तो आज राजस्थान की जो राजनीतिक स्थिति है, ऐसे में मतदाताओं के बीच भी दुविधा है. क्योंकि भाजपा की सभाओं में सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ नारे लगते हैं, लेकिन पीएम मोदी का समर्थन किया जाता है. वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस इसका फायदा उठाते हुए ही वोट मांग रही है. बिज्जी के इलाके यानी जोधपुर में यह दुविधा चरम पर दिख रही है, क्योंकि यहां बागी प्रत्याशियों ने दोनों दलों की नाक में दम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है. दोनों दलों की मान-मनौव्वल की तमाम कोशिशों के बावजूद इस संभाग की ऐसी कई सीटें हैं जहां बागी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं.

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जोधपुर संभाग की कुल 33 सीटों में से करीब 10 ऐसी सीटें हैं जहां कांग्रेस के बागी नेता पार्टी उम्मीदवारों को चुनौती दे रहे हैं. जोधपुर जिले की ओसिया सीट से कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से नाराज महेंद्र सिंह भाटी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और वह स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाते हैं. इसी जिले की बेलाडा, फलौदी और गोपालगढ़ सीटों पर भी बागियों ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रखी हैं. बेलाडा से कांग्रेस से बागी हुए बीरेंद्र सिंह झाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) से चुनावी मैदान में उतरे हैं. फलौदी से टिकट न मिलने से नाराज कोम्भ सिंह पतावत निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. बागी होने की वजह से कांग्रेस ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया. वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य थे.

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गोपालगढ़ सीट पर कांग्रेस के बागी पुखराज गर्ग रालोपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. पाली जिले की शहर सीट से भीमराज भाटी, पाली जिले की जयतारण सीट से राजेश कुमावत, बाड़मेर जिले की शिवाड़ा से बालाराम चौधरी, बायतू से उमेदा राम और जालोर जिले की आहोर सीट से जगदीश चौधरी से कांग्रेस से बागी हो कर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस के सह-प्रभारी एवं राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल ने यह स्वीकार किया कि बागियों ने चुनौती पैदा की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की संभावनाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. बंसल ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, ‘बागियों से असर तो पड़ता है लेकिन इस बार माहौल कांग्रेस के पक्ष में है और लोग पार्टी को वोट दे रहे हैं. हमने कई बागियों को मनाया है और कई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है.’

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दूसरी तरफ, जोधपुर संभाग के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डॉक्टर दामोदर व्यास का कहना है, ‘बागियों से कोई अंतर नहीं आने वाला है क्योंकि इस बार भाजपा के खिलाफ जनता चुनाव लड़ रही है और जनता कांग्रेस के पक्ष में मन बना चुकी है.’ जोधपुर संभाग की कई ऐसी सीटें हैं जहां बागियों ने भाजपा की भी मुश्किलें बढ़ा रखी हैं. पाली जिले की जयतारण सीट से वसुंधरा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे सुरेंद्र गोयल टिकट कटने से बागी हो गए. वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. पाली जिले की मारवाड़ जंक्शन सीट से भी पूर्व मंत्री लक्ष्मी नारायण दवे भी बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.

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इसी तरह, जालोर जिले सांचोर विधानसभा क्षेत्र में भी बागी ने भाजपा के लिए दिक्कत पैदा कर रखी है. यहां से पूर्व विधायक जीवा राम चौधरी भी निर्दलीय ताल ठोंक रहे हैं. बागियों से मिल रही चुनौती के बारे में पूछे जाने पर जोधपुर के भाजपा अध्यक्ष देवेन्द्र जोशी ने कहा, ‘भाजपा कैडर आधारित पार्टी है. हमारे लोग पार्टी और विचारधारा के लिए वोट करते हैं. इसलिए बागियों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि लोग भाजपा को सत्ता में बनाए रखना चाहते हैं.