नई दिल्ली. राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी करते वक्त इस बार कांग्रेस पार्टी ने हर उस संभावनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श किया, जिससे कि सत्ता की सीढ़ियां चढ़ना आसान हो सके. इसलिए चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के वक्त कई नेताओं को निराश होना पड़ा, तो कई उभरते कार्यकर्ता चुनाव मैदान में उतरने का अवसर पा गए. इसके अलावा, पार्टी ने अनुभवी नेताओं से भी किनारा नहीं किया, बल्कि जहां जरूरत पड़ी, ऐसे नेताओं को न सिर्फ पार्टी से जोड़े रखा, बल्कि उन्हें चुनाव मैदान में भी उतारा. ऐसे ही अनुभवी कांग्रेस नेताओं में से एक हैं हरिमोहन शर्मा. 78 साल के शर्मा राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि इस उम्र में भी राजनैतिक रूप से सक्रिय हरिमोहन शर्मा के जज्बे से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी काफी प्रभावित हुए. इसी वजह से उन्हें बूंदी सीट से पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया.

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शर्मा की सक्रियता से प्रभावित हुए राहुल गांधी
भारतीय जनता पार्टी की ही तरह, कांग्रेस ने भी 75 साल से ऊपर के नेताओं को चुनाव मैदान में न उतारने का नियम बना रखा है. राजस्थान में भी इस नियम पर अमल किया जाना था. लेकिन हरिमोहन शर्मा की जीवटता, अपने क्षेत्र की जनता के साथ उनका लगाव और राजनैतिक सक्रियता देखकर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी हैरान रह गए. हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए के अनुसार, हरिमोहन शर्मा अपनी सेहत के प्रति काफी सतर्क रहते हैं. सुबह उठकर टहलना, फिटनेस बनाए रखने के लिए अन्य सभी उपायों से वे जी नहीं चुराते. यही वजह है कि जीवन के आठवें दशक की ओर कदम बढ़ाने के बावजूद उनकी चुस्ती-फुर्ती को देखकर राहुल गांधी ने पार्टी के नियम को किनारे रखकर बूंदी विधानसभा सीट से हरिमोहन शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है.

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भाजपा के दिग्गज नेता को दे रहे हैं कड़ी टक्कर
हरिमोहन शर्मा जिस तरह अपने निजी जीवन में सेहत के प्रति गंभीर रहते हैं, उन्हें बूंदी विधानसभा क्षेत्र में भी कुछ ऐसी ही सक्रियता के साथ देखा जा रहा है. क्योंकि इस क्षेत्र से हरिमोहन शर्मा के सामने भाजपा के दिग्गज नेता अशोक डोगरा चुनावी मैदान में हैं, जो लगातार तीसरी बार अपनी जीत के प्रति आश्वस्त से दिखते हैं. लेकिन कांग्रेस के महासचिव और प्रदेश के पूर्व सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि हरिमोहन शर्मा की पिछले 40 वर्षों से अपने क्षेत्र के लोगों के साथ जुड़ाव और उनकी लगन इस बार कांग्रेस को बूंदी विधानसभा सीट दिलाने में मददगार साबित होगी. खुद शर्मा को भी उम्मीद है कि बूंदी क्षेत्र के 40 से 45 हजार ब्राह्मण और 20 हजार से ज्यादा मुस्लिम समुदाय के एकमुश्त वोट उन्हें मिलेंगे. इसके अलावा अन्य जातियों के वोट पर भी उन्हें भरोसा है. हालांकि बूंदी के 2.84 लाख मतदाताओं का वोट किसके पाले में जाएगा, यह 11 दिसंबर को ही पता चलेगा.