जयपुर: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान सरकार ने शनिवार को विधानसभा में पेश तीन कृषि संशोधन विधेयक लाई है. इनमें किसानों के हितों की रक्षा के लिए सख्‍त प्रावधान किया है. इसके मुताबिक, अगर किसान को उत्‍पीड़न किया जाता है तो इसके लिए दोषी को तीन साल से 7 साल की कैद और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकेगा. Also Read - राजस्थान में अब 800 रुपये में होगी कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच

बता दें कि इन विधेयकों का उद्देश्य केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी तीन कानूनों का राज्य के किसानों पर प्रभाव ‘निष्प्रभावी’ करना है. Also Read - पंजाब से हरियाणा, दिल्‍ली तक किसान मार्च की गूंज, पानी की बौछारें, आंसू गैस, लाठी चार्ज...पूरे हंगामें की खास Pics

राजस्थान सरकार ने विधानसभा में पेश तीन कृषि संशोधन विधेयकों में राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान किए हैं. इनमें किसानों के उत्पीड़न पर कम से कम तीन साल की कैद और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना शामिल है. Also Read - Agra Mumbai National Highway Blocked: मेधा पाटकर को उत्तर प्रदेश की सीमा में जाने से रोका, मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग बंद

राज्य के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने शनिवार को सदन में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 तथा आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 सदन के पटल पर रखे.

कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 में सरकार ने कहा है कि वह राज्य के कृषकों, कृषि श्रमिकों तथा कृषि और उससे संबंधित क्रियाकलापों में लगे हुए अन्य समस्त व्यक्तियों के भी हितों और आजीविका की सुरक्षा और संरक्षण के लिए राजस्थान कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम 1961 के विनियामक ढांचे के माध्यम से राजस्थान राज्य के कृषकों के लिए रक्षापायों को पुनः स्थापित करने की दृष्टि से यह विधेयक लाई है.

इस विधेयक में कृषकों के उत्पीड़न के खिलाफ दंड का प्रावधान है. इसमें लिखा गया है कि यदि कोई व्यापारी कृषकों का उत्पीड़न करता है तो उसे तीन से सात साल की कैद या जुर्माने से दंडित किया जा सकता है और यह जुर्माना पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा.

संसद पारित कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण अधिनियम 2020 का हवाला देते हुए विधेयक में कहा गया है कि, क्योंकि इस केंद्रीय अधिनियम का प्रत्यक्ष परिणाम न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र को निष्प्रभावी करना होगा और इससे कृषि तथा इससे संबंधित समुदायों की गंभीरता पूर्वक संचालित करने वाली विभिन्न अन्य दुर्बलता उत्पन्न होंगी. इसमें कृषक को विभिन्न तरह के शोषण से बचाने का कोई उपाय नहीं किया गया है.

मंत्री ने एक अन्य विधेयक कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 पेश किया. इसमें भी कृषकों के उत्पीड़न की स्थिति में सम्बद्ध व्यक्ति या कंपनी या कारपोरेट हाउस को तीन से सात साल की कैद या कम से कम पांच लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया जा सकेगा.

इसी तरह सरकार कृषि उपज की जमाखोरी और चोर बाजारी से उपभोक्ताओं का संरक्षण करने और कृषकों तथा कृषि श्रमिकों और कृषि तथा इससे संबंधित क्रियाकलापों में लगे अन्य समस्त व्यक्तियों के भी हितों और आजीविका की सुरक्षा और संरक्षण करने के लिए आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 लेकर आई है.

कुछ और विधेयक भी धारीवाल व कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने सदन में पेश किए. हालांकि इसके बाद शोकाभिव्यक्ति हुई और सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि भाजपा इन विधेयकों का विरोध करेगी और सोमवार को इन पर बहस के दौरान साबित कर देगी कि केंद्रीय कानून किसानों के हित में हैं. वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि चुनावों में किसानों की आय दोगुनी करने की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कारपोरेट कंपनियों के हितों के लिए काम कर रहे हैं और देश में किसान विरोधी कानून लाए गए हैं.

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि संबंधी कानूनों का कई जगह विरोध हो रहा है और कांग्रेस शासित पंजाब पहले ही इनके खिलाफ विधेयक पारित कर चुका है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहलोत ने 20 अक्तूबर को ट्वीट किया था,’ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, सोनिया गांधी व राहुल गांधी के नेतृत्व में हमारे अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और हमारी पार्टी किसान विरोधी कानून जो एनडीए सरकार ने बनाए हैं, उनका विरोध करती रहेगी. आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किये हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा.’