नई दिल्‍ली: राजस्‍थान हाईकोर्ट ने राज्‍य में कांग्रेस के सचिन पायलट गुट के विधायकों की याचिका पर आज केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की मांग मंजूर कर ली है. राजस्थान उच्च न्यायालय ने सचिन पायलट, बागी विधायकों द्वारा अयोग्यता के मुद्दे पर दायर याचिका में भारत सरकार को पक्षकार बनाए जाने की मांग स्वीकार कर ली है. Also Read - Oxygen issue : बीजेपी ने पूछा, दिल्‍ली सरकार क्‍यों सोचती हैं कि केंद्र भेदभाव कर रहा है?

हाईकोर्ट ने कांग्रेस के खिलाफ मामले में सचिन पायलट और विधायकों की अयोग्यता नोटिस के खिलाफ दायर याचिका में पार्टी को पक्षकार बनाया है. कोर्ट ने अगले आदेश तक स्‍पीकर के आदेश पर रोक लगा दी है. सुनवाई जारी रहेगी. Also Read - विधानसभा चुनाव में करारी हार की समीक्षा के लिए समिति बनाएगी कांग्रेस

वहीं, जयपुर के एक फाइव स्‍टार होटल में ठहरे मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों में से एक की तबीयत खराब हो गई. इसके बाद उन्‍हें अस्‍पताल में ठहराया गया है. Also Read - Who is Himanta Biswa Sarma: पूर्वोत्तर के चाणक्य कहे जाते हैं हेमंत बिस्व सरमा, कभी कांग्रेस सरकार में थे मंत्री, आज बनेंगे असम के CM

स्‍पीकर सीपी जोशी के वकील प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने कांग्रेस के खिलाफ मामले में सचिन पायलट और विधायकों की अयोग्यता नोटिस के खिलाफ दायर याचिका में पार्टी को पक्षकार बनाया है. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अदालत में केंद्र का प्रतिनिधित्व करेंगे.

मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा बृहस्पतिवार को दायर याचिका को मंजूर कर लिया. इसके बाद अदालत की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित हो गई.

पक्षकार बनाने की याचिका इस आधार पर दायर की गई थी कि संविधान संशोधन को चुनौती दी गई है और इसलिए भारत सरकार अब एक अनिवार्य पक्ष है. पायलट और कांग्रेस के बागी विधायकों ने गत शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अयोग्यता नोटिस को चुनौती दी थी और इस पर जिरह भी हुई है.

इस याचिका पर सोमवार को भी सुनवाई हुई और बहस मंगलवार को समाप्त हुई. अदालत ने मंगलवार को कहा कि वह रिट याचिका पर शुक्रवार को उचित आदेश देगी.

पिछले सप्ताह सोमवार और मंगलवार को कांग्रेस विधायी दल की दो बैठकों में हिस्सा लेने के लिए जारी व्हिप का उल्लंघन करने पर पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की . इसके बाद इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता संबंधी नोटिस जारी किया गया. पायलट खेमे ने हालांकि दलील दी कि व्हिप तभी लागू होता है, जब विधानसभा का सत्र चल रहा हो.

विधानसभा अध्यक्ष को दी गई शिकायत में कांग्रेस ने पायलट और अन्य असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(1)(ए) के तहत कार्रवाई की मांग की थी. विधायक सदन में जिस पार्टी का प्रतिनिधित्व करता है, यदि वह उसकी सदस्यता ‘स्वेच्छा’ से त्याग देता है तो यह प्रावधान उस विधायक को अयोग्य करार देता है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करने के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री पद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया जा चुका है.

बता दें कि हाईकोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में राजस्‍थान विधानसभा के अध्‍यक्ष (स्‍पीकर) कोई भी कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया था, लेकिन स्‍पीकर ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर की थी. जिस पर शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को कोई भी अपना फैसला देने के बजाय हाईकोर्ट से निर्णय देने के लिए कहा था. इसके बाद से सभी की निगाहें राजस्‍थान हाईकोर्ट पर लगी हुई हैं.

हाईकोर्ट बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी द्वारा अयोग्यता के मामले में दी गई नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर आज आदेश दे सकता है.

वहीं, मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों में से एक की तबीयत खराब हो गई. सांस लेने में दिक्कत होने के बाद कथुमार विधायक बाबूलाल बैरवा को जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वह कांग्रेस के उन विधायकों में से एक हैं जो फेयरमोंट होटल में ठहरे हैं.