Genome Sequencing Facility In Rajasthan: जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में जिनोम सिक्वेन्सिंग (अनुवांशिकी अनुक्रमण) की सुविधा शुरू की गई है. इसके साथ ही राज्य स्तर पर पूर्ण जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा उपलब्ध कराने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है.Also Read - 13 साल के बच्चे ने मां-बाप पर किया साइबर अटैक, फोन हैक कर पोस्ट की अश्लील तस्वीरें | Watch Video

चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि कोरोना की रोकथाम को दृष्टिगत राज्य में जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. जिनोम सिक्वेन्सिंग की तकनीक से वायरस के नए प्रकार के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकेगी. उन्होंने बताया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज में करीब एक करोड़ रुपये व्यय कर जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा तैयार की गई है. Also Read - बीच सड़क पर महिला की बेरहमी से पिटाई, नहीं बचाने आया एक भी शख्स | Watch Video

डॉ. शर्मा ने बताया कि जिनोम सिक्वेन्सिंग के लिये अब तक राज्य से नमूने केन्द्र सरकार की भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा राजस्थान के लिये निर्धारित दिल्ली स्थिति आईजीआईबी लैब में भिजवाये जा रहे थे. राज्य से प्रतिदिन 10 नमूने के आधार पर महीने में 300 नमूने भिजवाये जा रहे थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पा रही थी. Also Read - Shocking Video: राजस्थान में सड़क पर दिन दिहाड़े मारी गोली और चलाया चाकू

उन्होंने बताया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज में स्थापित मशीन पर नमूनों की जांव का कार्य 15 जून से शुरू कर दिया गया है. इस मशीन की क्षमता प्रतिदिन 20 नमूने की जांच करने की हैं व शीघ्र ही इसकी क्षमता को बढाकर प्रतिदिन 80 नमूनों की जायेगी. जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में प्राप्त हो रही है.

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के करीब 100 नमूनों की जिनोम सिक्वेन्सिंग की गई है. जांच रिपोर्ट के अनुसार इनमें से लगभग 90 प्रतिशत नमूनों में वायरस का डेल्टा प्रकार मिला है जबकि शेष 10 प्रतिशत नमूनों में बी 1.1 प्रकार से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.