नई दिल्ली. दो दशक से ज्यादा समय से राजस्थान के सीकर में बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा देकर अपनी पहचान बनाने वाला मुंबई का एक बिजनेसमैन, विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने उतरा है. मूल रूप से सीकर के रहने वाले वाहिद चौहान (Wahid Chowhan) ने बीते दिनों राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के बैनर तले सीकर विधानसभा सीट से अपना चुनाव नामांकन पर्चा दाखिल किया. इस पार्टी की स्थापना राजस्थान के निर्दलीय विधायक हनुमान बेनिवाल ने की है. वाहिद को भरोसा है कि अपने शहर के प्रति उनके लगाव को मतदाता समझेंगे और इस चुनाव में उन्हें जिताकर विधानसभा भेजेंगे. सीकर के मतदाता वाहिद को लड़कियों को मुफ्त शिक्षा देने वाले उद्योगपति के रूप में जानते-पहचानते हैं. अपनी इसी पहचान के भरोसे 70 वर्षीय वाहिद चौहान ने विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने का ‘जोखिम’ मोल लिया है.

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आगामी 7 दिसंबर को सीकर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में मतदान होना है. उसके बाद 11 दिसंबर को मतों की गिनती होगी. देखना रोचक होगा कि खुद सिर्फ इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने वाले (जैसा उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा है), लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने वाले और राजनीति नहीं, बल्कि समाज सेवा करने का दावा करने वाले वाहिद चौहान की उम्मीदें रंग लाती है या नहीं. क्योंकि उनके सामने भाजपा और कांग्रेस के दो दिग्गजों की लड़ाई है. भाजपा की तरफ से जहां मौजूदा विधायक रतन जलधारी चुनावी अखाड़े में खम ठोंक रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने सीकर विधानसभा सीट पर राजेंद्र पारीक को उतारा है. हालांकि राजेंद्र पारीक को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में रतन जलधारी से शिकस्त मिल चुकी है.

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सीकर को लड़कियों की शिक्षा में राज्य में अव्वल बनाने वाले वाहिद चौहान मुंबई में अपनी कंपनी चलाते हैं. कंपनी के कारोबार से कमाए हुए पैसे का बहुत सारा भाग चौहान ने सीकर में बालिका शिक्षा की उन्नति में लगाया है. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के अनुसार, चौहान के कॉलेज में लड़कियों को मुफ्त शिक्षा के साथ-साथ फ्री किताबें, यूनिफॉर्म दी जाती हैं. उनका कॉलेज यूं तो मदरसा शिक्षा पद्धति के अनुसार स्थापित किया गया है, लेकिन यह आम मदरसा जैसा नहीं है. बल्कि इसमें मुख्यधारा के विषय भी पढ़ाए जाते हैं. कई मायनों में चौहान का कॉलेज अनोखा भी है, क्योंकि इस संस्थान में उर्दू और अरबी के साथ-साथ संस्कृत भाषा की भी पढ़ाई कराई जाती है. हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लिए बने इस कॉलेज में विज्ञान, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के साथ-साथ सभी विषयों की पढ़ाई होती है. मुस्लिम समुदाय की लड़कियों के लिए यह छूट भी दी जाती है कि अगर वह चाहें तो मदरसा शिक्षा व्यवस्था के तहत पढ़ाई कर सकती हैं.

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शुरुआती दिनों में आई समस्याओं के बारे में वाहिद चौहान ने अखबार को बताया कि कॉलेज की स्थापना के समय स्थानीय लोगों को आशंका थी कि मैं भोले-भाले मुस्लिम लोगों को बहकाने के लिए यह संस्थान खोल रहा हूं. उन्हें इस बात का भी डर था कि मैं मुंबई से आकर सीकर में फाइव-स्टार होटल बनाकर बिजनेस करूंगा. लेकिन लड़कियों को शिक्षित करने की मेरी मुहिम के बारे में जानने के बाद, लोगों ने मेरी मदद की. समाज आगे आया और सीकर लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में पूरे प्रदेश में नंबर वन पर पहुंच गया. इस चुनाव में उन्हें मतदाता किस आधार पर वोट देने की बात पर चौहान ने कहा, ‘हम लोगों ने सीकर में बालिका शिक्षा का लक्ष्य हासिल कर लिया है. आज सीकर की लड़कियां उच्च शिक्षित हैं. आज यहां के कई घरों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शैक्षणिक योग्यता ज्यादा है. आज की तारीख में अल्पसंख्यक परिवार की कोई भी लड़की सीकर में अशिक्षित नहीं है. इसलिए अब लड़कों की शिक्षा पर ध्यान देने का समय आ गया है.’

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