नई दिल्ली: राजस्थान में अशोक गहलोत (Ashok Government) की सरकार तो बच गई लेकिन सियासी उठापटक अभी जारी है. भारतीय ट्रायबल पार्टी (Bhartiya Tribe Party) ने अब एक बार फिर अपना इरादा बदल लिया है. अब भारतीय ट्राइबल पार्टी ने कहा है कि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) के साथ नहीं है. जल्दी ही अशोक गहलोत से मुलाकात करेंगे, इसके बाद ये फैसला लिया जायेगा कि किसे समर्थन और किसे नहीं. Also Read - बागियों के खिलाफ कांग्रेस विधायकों की नाराजगी स्वभाविकः गहलोत

बता दें कि भारतीय ट्रायबल पार्टी के राजस्थान में दो विधायक हैं. एक दिन पहले ही पार्टी ने अपने दोनों विधायकों को पत्र जारी कर कहा था कि पार्टी किसी को समर्थन नहीं दे रही है. अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो विधायक न तो कांग्रेस (Congress) को वोट, न बीजेपी (BJP) को और न ही सचिन पायलट के साथ होंगे. विधायक तटस्थ रहेंगे. जब तक पार्टी द्वारा आदेश न दिया जाएग. Also Read - मोदी सरकार के खिलाफ सबसे मुखर हैं राहुल गांधी, इसलिए कांग्रेस कराएगी अध्यक्ष पद पर वापसी!

इस बीच, पायलट और उनके 18 वफादार विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi) द्वारा अयोग्यता का नोटिस जारी करने के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) का रुख किया है. जहां पायलट ने राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, वहीं कांग्रेस ने रणनीतिक रूप से दो दिनों में विधायक दल की दो बैठकें बुलाकर पायलट से बैठक में भाग लेने की अपील की. Also Read - राजस्थान में गुरुवार को होगी BJP विधायक दल की बैठक, गुजरात से वापस आएंगे दो दर्जन से अधिक विधायक

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस 10वीं अनुसूची के पैरा 2 के खंड (ए) को लागू करना चाहती है. अध्यक्ष ने पायलट और उनके सहयोगी विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. बता दें कि सचिन पायलट खेमे (Sachin Pilot) और कांग्रेस के बीच विवाद अब हाईकोर्ट पहुँच गया है. हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई हो रही है. सचिन पायलट खेमा विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को लेकर राजस्थान, हाईकोर्ट पहुंचे हैं. विधानसभा से सदस्यता जाने के खतरे के सचिन पायलट खेमे की दलील दी है कि वह किसी भी तरह से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं. गहलोत सरकार के खिलाफ उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है. ऐसे में अयोग्य ठहराए जाने का नोटिस क्यों दिया गया है. साथ ही मीटिंग सदन के बाहर थी और सदन के बाहर की मीटिंग में शामिल नहीं होने के लिए नोटिस नहीं दिया जा सकता है. सचिन पायलट खेमे का कहना है कि वह कांग्रेस में ही हैं. कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा है.