जयपुर: राजस्थान में मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र 31 जुलाई से आहूत करने के लिए राज्यपाल को एक संशोधित प्रस्ताव भेजा है. राजभवन के सूत्रों ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है. राजभवन सूत्रों के अनुसार शनिवार देर रात राज्यपाल के पास पहुंचे प्रस्ताव में राज्य मंत्रिमंडल ने विधानसभा का सत्र 31 जुलाई से आहूत करने का आग्रह किया है.Also Read - राष्ट्रपति मुर्मू के खिलाफ टिप्पणी: कांग्रेस नेता उदित राज को महिला आयोग ने भेजा नोटिस, 10 अक्टूबर तक मांगा स्पष्टीकरण

अशोक गहलोत कैबिनेट के इस प्रस्‍ताव के गवर्नर हाउस में पहुंचने के बाद सभी की निगाहें राज्‍यपाल कलराज मिश्र के फैसले पर टिक गईं हैं. बता दें कि कांग्रेस राज्‍यपाल पर पहले से ही कई आरोप लगाने के साथ धरना- प्रदर्शन तक की बात कर चुकी है. Also Read - Udit Raj On Droupadi Murmu : महामहिम द्रौपदी मुर्मू पर कांग्रेस नेता उदित राज के बिगड़े बोल, कहा 'ऐसा राष्ट्रपति किसी देश को ना मिले' | Watch video

राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राजभवन में कांग्रेस विधायकों के शुक्रवार को पांच घंटे के धरने के बाद राज्य सरकार से छह बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था. कांग्रेस पार्टी के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल के आश्वासन के बाद राजभवन में धरना समाप्त कर दिया गया था. मिश्र ने कहा था कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है और किसी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. Also Read - अशोक गहलोत ने कहा- इस साल जल्दी आ सकता है राजस्थान का बजट, हम इसके बाद ही चुनाव में जाएंगे

राज्यपाल ने गहलोत को स्पष्टीकरण के साथ विधानसभा सत्र बुलाए जाने के बारे में फिर से मंत्रिमंडल की ओर से प्रस्ताव भेजने को कहा था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक शनिवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर हुई. बैठक में उन बिंदुओं पर चर्चा की गई, जो राज्यपाल ने पहले के प्रस्ताव में उठाए थे. इसके बाद संशोधित प्रस्ताव को मंजूर किया गया. बता दें कि 200 विधानसभा सदस्यों वाली विधानसभा में 19 असंतुष्ट विधायकों सहित कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 72 विधायक हैं.

कांगेस ने ‘लोकतंत्र के लिए आवाज उठाओ’ मुहिम शुरू की
राजस्थान में कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और राष्ट्रीय डिजिटल अभियान ‘लोकतंत्र के लिए आवाज उठाओ’ (‘स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी’) की शुरूआत की. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा, ”राजस्थान की कांग्रेस सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए सफलतापूर्वक कार्य कर रही है और अपने प्रबंधन से इस महामारी पर नियंत्रण का प्रयास कर रही है, जिसे वैश्विक स्तर पर भी सराहा गया है. ऐसे समय में राज्य की चुनी हुई सरकार को भाजपा अस्थिर करने का प्रयास कर रही है.”

लोकतंत्र की जीत होगी और भाजपा का षड्यंत्र विफल होगा
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ”भाजपा सरकार और उसके नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी सरकारों को गिराने का षड्यंत्र रच रहे हैं. कोरोना वायरस संकट में सराहनीय कार्य कर रही राजस्थान कांग्रेस सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचना बंद करें.” डोटासरा ने कहा, ”कांग्रेस सरकार कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए प्रभावी रूप से काम कर रही है. यहां तक कि प्रधानमंत्री ने भी उसके प्रयासों की सराहना की है. भाजपा और उसके नेता सरकार को गिराने का प्रयास क्यों कर रहे हैं? मैं कहना चाहता हूं कि लोकतंत्र की जीत होगी और भाजपा का षड्यंत्र विफल होगा.’’

क्या बहुमत दिल्ली के हाथों की कठपुतली है?
जयपुर के एक होटल में कांग्रेस नेताओं के साथ ठहरे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ”पहले मध्यप्रदेश और अब राजस्थान में प्रजातंत्र की दिनदहाड़े हत्या का भाजपाई षड्यंत्र बेनक़ाब हो चुका है.” उन्होंने कहा, ”क्या प्रजातंत्र दिल्ली दरबार का दास है? क्या बहुमत दिल्ली के हाथों की कठपुतली है? क्या वोट के शासन के मायने नहीं हैं? अगर नहीं, तो मिल कर आवाज़ उठाएं.”