राजस्थान में जारी सियासी रस्साकशी के बीच राजभवन संघर्ष का केंद्र बन गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कैबिनेट की सिफारिश के बावजूद राज्यपाल द्वारा विधानसभा का सत्र बुलाने के बारे में फैसला नहीं लेने के कारण अब लड़ाई राजभवन बनाम कांग्रेस सरकार हो गई है. शुक्रवार को पूरे दिन चले ड्रामे के बीच देर रात तक अशोक गहलोत ने अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक की. इस बीच कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देने का निर्णय लिया है. Also Read - Rajasthan Marriage Guidelines: विवाह समारोह को लेकर गहलोत सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस, नहीं किया गया पालन तो....

अशोक गहलोत कैबिनेट की बैठक शुक्रवार रात मुख्यमंत्री निवास पर हुई. पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में विधानसभा सत्र बुलाए जाने की कैबिनेट के प्रस्ताव पर राजभवन द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा हो रही है. Also Read - विधानसभा चुनाव में करारी हार की समीक्षा के लिए समिति बनाएगी कांग्रेस

राजभवन ने छह बिंदुओं पर जवाब मांगा है. राजभवन द्वारा जिन छह बिंदुओं को उठाया गया है उनमें से एक यह भी है कि राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत प्राप्त करने के लिए सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है? इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि विधानसभा सत्र किस तिथि से आहूत किया जाना है, इसका उल्लेख केबिनेट नोट में नहीं है और ना ही कैबिनेट द्वारा कोई अनुमोदन किया गया है. Also Read - Who is Himanta Biswa Sarma: पूर्वोत्तर के चाणक्य कहे जाते हैं हेमंत बिस्व सरमा, कभी कांग्रेस सरकार में थे मंत्री, आज बनेंगे असम के CM

गौरतलब है कि राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट की बगावत के बाद से अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार के सामने राजनीतिक संकट पैदा हो गए हैं.