अजमेर: अजमेर पुलिस ने अजमेर दरगाह की हर रात तलाशी लेनी शुरू की है ताकि कोई संदिग्ध इसके परिसर में ठिकाना नहीं बना सके तथा बिना पहचान बताए वहां रुके लोगों को भी चिह्नित किया जा सके. पुलिस को ऐसी सूचना मिली थी कि कुछ लोग श्रद्धालु के रूप में दरगाह आते हैं और फिर दिन रात वहीं रहना शुरू कर देते हैं. इसको देखते हुए पुलिस ने दरगाह की अंजुमन व दरगाह कमेटी को साथ लेकर तलाशी की यह पहल की है.

इस तरह की पहली जांच व तलाशी मंगलवार देर रात को की गई. इस दौरान बिना किसी कारण कई दिन से दरगाह परिसर में रह रहे 100 से अधिक लोगों को बाहर निकाला गया. देर रात एक बजे से तीन बजे तक की इस कार्रवाई के दौरान कुछ जेबकतरे भी पकड़े गए.

अजमेर के पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने कहा, ‘दरगाह का बड़ा परिसर है जहां अनेक लोग श्रद्धालु के रूप में आते हैं लेकिन लौटते नहीं बल्कि स्थायी रूप से वहीं रहना शुरू कर देते हैं. इनमें से ज्यादातर अपनी असली पहचान ही नहीं बता पाते और दरगाह कमेटी भी उन्हें नहीं जानती. ऐसे लोगों की उपस्थिति सुरक्षा के लिए खतरा है इसलिए हर रात जांच पड़ताल व तलाशी का फैसला किया गया है.’

उन्होंने कहा कि इस आशय का फैसला एक बैठक में किया गया. बैठक में दरगाह कमेटी व खादिम कमेटी के प्रतिनिधि मौजूद थे. पिछले दो दिन में हमने अनेक जेबकतरों व अन्य लोगों को दरगाह से पकड़ा है जो बिना किसी कारण के ही वहां रह रहे हैं. हमने उनसे कहा है कि वे किसी रैन बसेरे या आश्रय स्थल में रहे या होटल वगैरह में कमरा लें. लेकिन दरगाह में न रुकें.

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की यह दरगाह दिन भर श्रद्धालुओं से भरी रहती है. देश विदेश के हजारों श्रद्धालु हर दिन यहां आते हैं. अंजुमन कमेटी के सचिव वाहिद हुसैन चिश्ती ने कहा, ‘यह एक अच्छी पहल है क्योंकि अनेक लोग सारा सारा दिन दरगाह परिसर में ही रहना शुरू कर देते हैं जो चिंता की बात है.’ उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2007 में दरगाह में हुए बम धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी और 17 अन्य घायल हुए थे.

(इनपुट-भाषा)