नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज को छोड़कर शायद ही किसी मंत्री ने भारत समेत पूरे विश्व का ध्यान खींचा हो. बतौर विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने इस पद को जनता से जोड़ने का अभूतपूर्व काम किया. प्रवासी भारतीय हों या खाड़ी देशों में फंसे मजदूर या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से में रह रहा कोई भी भारतीय, मुसीबत की घड़ी में जिसने भी सुषमा स्वराज को याद किया, उन्हें करीब पाया. टि्वटर पर मदद के लिए बैठीं सुषमा स्वराज और उनके मंत्रालय की 24 घंटे की सक्रियता ने विदेश मंत्रालय से जैसे कूटनीतिक विभाग को भी जनता के मंत्रालय के रूप में स्थापित कर दिया था. इसलिए तो जब एक बार किसी टि्वटर यूजर ने उनसे मंगल ग्रह पर मदद करने की बात की तो सुषमा स्वराज ने उसे जवाब दिया- जी हां, भारतीय दूतावास मंगल ग्रह पर भी आपकी मदद के लिए तैयार है.

जन आकांक्षाओं को पूरा करने वाली ऐसी मंत्री का अचानक चले जाना, सचमुच हतप्रभ कर देने वाला है. सुषमा स्वराज के टि्वटर अभियान को याद करें तो आपको इराक में फंसी हुई नर्सों को सुरक्षित निकालने, कुवैत और दुबई में काम दिलाने के बहाने धोखा खाने वाले मजदूर और पाकिस्तान में फंसीं उजमा या गीता की सकुशल वापसी के किस्से याद आएंगे. सुषमा स्वराज के मानवीयता भरे कदमों के कई किस्से हैं जिसकी चर्चा देश ही नहीं, पूरी दुनिया में होती है. उनके निधन के बाद आइए याद करते हैं सुषमा स्वराज के उन 10 ट्वीट्स को जिससे एक विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए खुद को जनता से जोड़ा.

1- यमन में फंसे भारतीय मजदूरों को सुरक्षित वापस लाना सुषमा स्वराज का ऐसा ही महत्वपूर्ण अभियान था. विदेश मंत्री के रूप में स्वराज ने न सिर्फ भारतीय मजदूरों की सुरक्षित वापसी कराई, बल्कि दुश्मन देश पाकिस्तान के 3 मजदूर भी वहां से छुड़ाए. भारतीय नौसेना की मदद से चलाए गए इस अभियान में 11 भारतीयों की जान बचाई गई थी. इन मजदूरों को यमन से पाकिस्तान के कराची ले जाया गया और फिर एक विशेष हवाई जहाज उन्हें वहां से भारत लाया.

2- वर्ष 2016 में पीएम मोदी के मंत्रिमंडल का विस्तार होना था, लेकिन विदेश मंत्रालय के किसी महत्वपूर्ण कार्य को लेकर सुषमा व्यस्त थीं. इस वजह से उन्हें अंदाजा हो गया था कि वह शपथ-ग्रहण समारोह में भाग नहीं ले सकेंगी. कहीं ये बात मीडिया में सुर्खियां न बन जाए, इसके मद्देनजर सुषमा स्वराज ने शपथ ग्रहण समारोह से कुछ घंटे पहले ट्वीट कर मीडिया से कहा- कृपया शपथ ग्रहण समारोह से सुषमा स्वराज की दूरी को हेडलाइन न बनाएं.

3- विदेश मंत्री की मददगार छवि को लेकर कसे जाने वाले तंज का भी सुषमा स्वराज उसी अंदाज में जवाब देती थीं. एक टि्वटर यूजर ने जब उनसे अपने खराब रेफ्रिजरेटर को ठीक करने में मदद मांगी, तो सुषमा ने शालीनता के साथ उसे जवाब दिया था. स्वराज ने अपने उत्तर में कहा था- भाई, मैं तुम्हारे रेफ्रिजरेटर को ठीक करने में मदद नहीं कर सकती, क्योंकि मैं यहां तनाव से घिरे लोगों की सेवा में व्यस्त हूं.

4- मंगलयान के प्रक्षेपण के समय का एक ट्वीट तो अर्से तक चर्चा में रहा था. दरअसल, एक टि्वटर यूजर ने उनसे कहा था- मैं मंगल ग्रह पर फंसा हूं, मंगलयान-1 के जरिए लाया गया खाना खत्म हो चुका है, मंगलयान-2 कब आएगा? इस पर सुषमा स्वराज ने उस यूजर को जवाब दिया- अगर आप मंगल ग्रह पर जाकर फंस जाएंगे, तो भारतीय दूतावास वहां भी आपकी मदद के लिए तैयार होगा.

5- मलेशिया से एक भारतीय का मदद मांगने का किस्सा भी रोचक है, जब भाषाई समस्या के कारण उसे ये लगा कि विदेश मंत्रालय शायद उसकी मदद नहीं कर सकेगा. इस पर सुषमा स्वराज ने उसे उत्तर दिया- भाषा को लेकर कोई समस्या नहीं है. विदेश मंत्री बनने के बाद मैंने अंग्रेजी बोलने के सभी तरीके और व्याकरण (accents and grammar) सीख लिए हैं. आपको मदद जरूर मिलेगी.

6- हालिया लोकसभा चुनाव के समय जब भाजपा नेताओं ने अपने टि्वटर हैंडल पर नाम के आगे चौकीदार शब्द जोड़ लिया था, उस समय एक इंटरनेट यूजर ने इसको लेकर सवाल पूछा था. इस पर जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा था- मैं भारत से दूर विदेशों में रहने वाले भारतीयों और उनकी समस्याओं का ख्याल रखती हूं, इसलिए मैंने अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द जोड़ा है.

7- सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री रहते हुए विदेशों में फंसे हर भारतीय की मदद की. लेकिन एक बार जब टि्वटर पर एक यूजर ने उनके ऊपर यह आरोप लगाया कि वह सिर्फ मुसलमानों की ही मदद करती हैं, हिंदुओं को वीजा लेने में कठिनाई आती है, तो इसका जवाब भी उन्होंने काफी सधे अंदाज में दिया. स्वराज ने उस यूजर को लिखा- भारत मेरा देश है. सभी भारतीय मेरे अपने हैं. जाति, राज्य, भाषा या धर्म मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता.

8- विदेश मंत्री से रेलवे के एक कर्मचारी का तबादला करने से संबंधित आग्रह करना भी इंटरनेट पर खूब चर्चित रहा था. दरअसल, झांसी में कार्यरत अपनी पत्नी का तबादला पुणे करने के लिए एक आईटी पेशेवर ने सुषमा स्वराज से आग्रह किया था. इस पर सुषमा ने उसे जवाब दिया- अगर आप या आपकी पत्नी मेरे मंत्रालय में कार्यरत होते और तबादला करने का इस तरह का आग्रह मेरे पास आया होता, तो मैं आपका निलंबन पत्र तत्काल आपको भेज देती.

9- एक टि्वटर यूजर ने जब सुषमा पर यह आरोप लगाया कि राजनेता, देशवासियों की नहीं सिर्फ अपनी फिक्र करते हैं, तो इसका जवाब भी विदेश मंत्री ने बेहद शालीन तरीके से दिया था. सुषमा स्वराज ने उस यूजर से कहा था- कृपया ऐसी बातें न सोचें. भारत के राजनेता बहुत संवेदनशील और मददगार होते हैं.

10- वर्ष 2018 में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दौरान एक बुजुर्ग यात्री के ट्वीट ने भी इंटरनेट पर सुर्खियां बटोरी थी. चंदर नंदी नामक बुजुर्ग यात्री ने अपना और पत्नी का कार्ड नंबर देते हुए सुषमा स्वराज से आग्रह किया था- नमस्ते मैडम, मैं और मेरी पत्नी कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे हैं. लेकिन हम दोनों को अलग-अलग समूहों में बांट दिया गया है. मेरी पत्नी अकेले यात्रा नहीं कर सकती. मैं अगले साल 70 साल का हो जाऊंगा. इस पर सुषमा स्वराज का दिया जवाब एक संवेदनशील महिला और जिम्मेदार मंत्री का गवाह है. स्वराज ने बुजुर्ग यात्री को जवाब देते हुए ट्वीट किया- आपको और आपकी पत्नी को अलग करने का दोषी कंप्यूटर है. लेकिन आप चिंता न करें. हम आप दोनों को एक ही समूह में यात्रा करने का मौका देंगे.