नई दिल्ली: लोग राजनीति में आते हैं. एक आम कार्यकर्ता से लेकर लोग सीएम-पीएम तक बन जाते हैं. ऐसी कहानियाँ देखी और सुनी जाती हैं, लेकिन इंजीनियरिंग के बाद टीचर बनना, फिर आईपीएस, फिर आईएसएस… सालों तक डीएम बने रहने के बाद सांसद लेकर सीएम तक बनकर राजनीति के कई आकाश छूने वाले अजीत जोगी (Ajit Jogi) शायद इकलौते नेता थे, जिन्होंने इतने रंग देखे. मध्य प्रदेश में प्रोबेशन अधिकारी रहते हुए इंदिरा गांधी से मिले. इंदिरा ने कहा- इस देश में असली ताकत डीएम, सीएम और पीएम के हाथ में होती है. उस समय प्रोबेशन अधिकारी रहे अजीत जोगी के मन में ये बात बैठ गई. अजीत जोगी फिर आईएएस बन गए. सालों तक डीएम रहे, लेकिन राजीव गांधी ने अजीत जोगी के मन में समाई पुरानी बात को उकेर दिया. बताते हैं कि एक बार राजीव गांधी कार्यालय से फ़ोन आया- कलक्टर पद से इस्तीफा दो और राजनीति में आ जाओ. बस इसके बाद अजीत जोगी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. Also Read - Coronavirus in Chhattisgarh: 91 और लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि, संक्रमितों की संख्या 4 हजार के करीब, देखें कहां कितने मामले

छत्तीसगढ़ के पहले सीएम
करीब दो दशक पहले अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाले अजीत जोगी (Ajit Jogi) का आज निधन हो गया. वह लगभग 20 दिनों से रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती थे. 74 वर्षीय जोगी ने आज दोपहर बाद 3.30 बजे अंतिम सांस ली. भारतीय प्रशासनिक सेवा की अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अजीत प्रमोद कुमार जोगी जिलाधिकारी से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले संभवत: अकेले शख्स थे. छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले के एक गांव में शिक्षक माता पिता के घर पैदा हुए जोगी को अपनी इस उपलब्धि पर काफी गर्व था. Also Read - शरद पवार का पलटवार, बोले- मतदाताओं को हल्के में लेने की भूल न करें, इंदिरा और अटल को भी हार मिली थी

राजीव गांधी के ऑफिस से आया था फ़ोन
वह 14 साल तक मध्य प्रदेश में डीएम रहे. तब मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के रूप में विभाजित नहीं हुआ था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तब जोगी इंदौर में जिलाधिकारी के तौर पर पदस्थ थे और सबसे लंबे समय तक डीएम बने रहने का रिकार्ड उनके नाम हो चुका था. जून 1986 में उन्हें पदोन्नति के आदेश जारी हो चुके थे और जोगी इंदौर जिले में उनकी विदाई के लिए हो रहे आयोजनों में व्यस्त थे जब प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन कर नौकरी से इस्तीफा देने और राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने को कहा गया. वह बेहद असमंजस थे कि क्या किया जाये. काफी सोच विचार और सलाह के बाद उन्होंने राजनीति में जाने का फैसला किया. और कांग्रेस में शामिल होकर राज्यसभा सांसद बन गए. वह दो बार राज्यसभा सांसद रहे. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए. उनका कार्यकाल शानदार रहा. Also Read - Coronavirus Chhattisgarh News Today: छत्तीसगढ़ में कोविड19 संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 140 और लोगों में कोरोना वायरस पॉजिटिव होने की पुष्टि

कई उतार चढ़ाव देखे
जोगी ने पहली बार 1998 में चुनाव लड़ा और सांसद बन गए. 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना तो कांग्रेस नेतृत्व ने अजीत जोगी को पहला सीएम बना दिया. ये बेहद चौंका देने वाला फैसला था. सीएम के रूप में अजीत जोगी को छत्तीसगढ़ का करिश्माई नेता बनने में समय नहीं लगा, लेकिन इसके बाद वह कई तरह के विवादों में भी फंसे और 2003 में उनकी कुर्सी चली गई. उनके बेटे पर हत्या का आरोप लगा और बीजेपी विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश के आरोप में कांग्रेस ने उन्हें निलंबित भी कर दिया. 2004 में निलंबन वापस हुआ, टिकट मिली और एक बार फिर वह सांसद चुन लिए गए.

कांग्रेस से अलग हुए, लेकिन…
2004 में अजीत जोगी दुर्घटना का शिकार हो गए. और उनकी कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर गया. वह राजनीति में कई तरह के उतार चढ़ाव के बाद भी सक्रिय रहे. छत्तीसगढ़ की राजनीति में वह जब कांग्रेस की ओर से हाशिये पर जाने लगे तो उन्होंने अपनी पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बना ली और 2018 में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन इसमें बहुत अधिक सफलता उन्हें नहीं मिली.