नॉर्थ ईस्ट में कांग्रेस के पास सिर्फ मिजोरम ही बचा है. यहां पिछले 10 साल से सीएम ललथनहवला के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार है. वहां का चुनाव कांग्रेस बचाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है. 10 लाख की आबादी वाले 40 विधानसभा वाले इस राज्य में 28 नवंबर को वोटिंग होनी और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर कई सीनियर नेता राज्य का दौरा कर चुके हैं. वहीं, अमित शाह के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 नवंबर को राज्य के दौरे पर हैं.

बता दें कि कांग्रेस नॉर्थ ईस्ट के असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड चुनाव हार चुकी हैं. इसमें असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल में तो बीजेपी सत्ता हासिल करने में कामयाब रही है. कांग्रेस के पास 40 में से 34 सीटें हैं. वहीं, 5 सीट मिजोरम नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस के पास 1 सीट है. बीजेपी के पास राज्य में खोने के लिए कुछ नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारा है. उसका मकसद यहां से भी कांग्रेस को सत्ता में धकेलने का है.

राहुल गांधी बीजेपी-संघ पर लगा रहे हैं आरोप
कांग्रेस राज्य में अपने मुख्य विपक्षी पार्टी मिजोरम नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को हर मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रही है. वह एमएनएफ पर सबसे बड़ा आरोप यह लगा रही है कि वह जीती तो बीजेपी के साथ गठबंधन कर लेगी. दूसरी तरफ राज्य में ईसाई वोट बैंक को अपने साथ लाने के लिए कांग्रेस और एमएनएफ दोनों अपने-अपने स्तर पर प्रचार कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी और संघ पर मिजोरम की संस्कृति को तबाह करने का आरोप लगाकर अपने वोटबैंक को वापस बनाए रखने का प्रयास किया है.

40 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी
दूसरी तरफ बीजेपी पहली बार राज्य की 40 सीटों पर चुनाव मैदान में हैं. अमित शाह ने अपने दौरे में कांग्रेस पर जहां वंशवाद पर निशाना साधा, तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी घेरने की कोशिश की. दूसरी तरफ कांग्रेस के इस आरोप पर कि बीजेपी एमएनएफ के साथ चली जाएगी, अमित शाह ने बचाव किया है. बीजेपी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके पूर्व मंत्री बुद्ध धन चकमा को बीजेपी में शामिल किया है.

क्षेत्रीय पार्टियों ने किया है गठबंधन
मिजोरम में 10 साल से कांग्रेस सत्ता में है और उसे दोनों बार बड़ी जीत मिली है. ऐसे में क्षेत्रीय पार्टी पीपुल्स रिप्रजेंटेशन ऑर आइडेंटिटी एंड स्टेट और मिजोरम, सेव मुजोरम फ्रंट एंड ऑपरेशन मिजोरम ने गठबंधन कर लिया है. दूसरी तर जोराम राष्ट्रवादी पार्टी के साथ जोराम एक्सोदस मूवमेंट ने भी हाथ मिला लिया है. बीजेपी एमएनएफ की अबतक सहयोगी रही है. लेकिन इस बार वह अकेले ही राज्य में चुनाव लड़ रही है.

क्या है समीकरण
मिजोरम ईसाई बाहुल राज्य है. यहां की 87 फीसदी आबादी इसी से ताल्लुक रखती है. ऐसे में बीजेपी का हिंदुत्व का चेहरा उसके लिए चिंता का सबब रहती है. बीजेपी की इसी छवि को देखते हुए इस बार एमएनएफ ने उसका साथ छोड़ दिया है. यह ऐसा राज्य है जहां बीजेपी अबतक अपना खाता नहीं खोल पाई है. इस बार पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों में उसे जिस तरह से सफलता मिली है, उससे लग रहा है कि यहां बेहतर कुछ कर सकती है.