मुंबई. आरक्षण की मांग को लेकर मराठा एक बार फिर सड़क पर हैं. इस मुद्दे पर राज्य में अबतक 6 लोगों ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली है. एक शांति मार्च से शुरू ये प्रदर्शन अब हिंसक रूप लेता दिख रहा है. मराठों की मांग है कि उन्हें सरकारी नौकरियों और सरकारी कॉलेजों में 16 फीसदी आरक्षण मिले. आइए जानते हैं मराठा कौन हैं, उनकी मांग क्या है, किस तरह की हो रही है राजनीति और कोर्ट के साथ-साथ आयोगों ने क्या तर्क दिया है… Also Read - मराठा आरक्षण वैध, लेकिन इसे 16 से घटाकर 12-13 प्रतिशत करना चाहिए: हाईकोर्ट

कौन हैं मराठा, कम्यूनिटी का क्या है असर?
महाराष्ट्र में मराठा कम्यूनिटी एक मजबूत और संपन्न कम्यूनिटी है. आबादी के स्तर पर देखें तो राज्य के 32 फीसदी लोग इसी समुदाय से आते हैं. यह समुदाय राज्य में अपने स्तर पर पूरी तरह स्थापित है. उदाहरण के तौर पर देखें तो राज्य की 80 फीसदी जमीन इसी कम्यूनिटी के पास है. 105 में से 86 चीनी मिलें उनके पास हैं. इस समुदाय के लोग 70 फीसदी कोऑपरेटिव बॉडी को नियंत्रित करते हैं. राजनीतिक रूप से देखें तो 1962 से लेकर अबतक विधानसभा में तकरीबन 60 फीसदी विधायक इसी समुदाय से आते हैं. इसका असर ये रहा है कि राज्य के 18 में से 12 सीएम मराठा ही रहे हैं. Also Read - सरकार ने मराठा आरक्षण के तहत नौकरी के लिए निकाला विज्ञापन, कोर्ट ने फटकारते हुए कहा- इतनी जल्दी क्यों है

मराठाओं ने कौन सा मुद्दा उठाया?
सवाल ये उठता है कि राज्य में मराठा इस मजबूत स्थिति में हैं तो उनके मुद्दे क्या हैं? इसका जवाब है कि मराठा राज्य में आर्थिक उदारीकरण चाहते हैं. उनका कहना है कि राज्य की नौकरियों में दूसरे समुदाय के लोगों का आधिपत्य है और उनके समुदाय के लोगों के पास कम सरकारी नौकरियां हैं. राज्य में कृषि संकट किसी से छिपी नहीं है खास तौर पर विदर्भ इलाके में. वहां किसान लगातार खुदकुशी करने को मजबूर हैं. पानी के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है. ऐसे में मराठा किसानों के मुद्दे को भी उठाए हुए हैं. Also Read - केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले को युवक ने मारा थप्पड़, पुलिस के सामने हुई मारपीट

मराठा आरक्षण: अबतक 6 ने की खुदकुशी, मुंबई में आज से जेल भरो प्रदर्शन

मराठाओं की मांग क्या है?
मराठा आरक्षण की मांग साल 2016 से शुरू हुई. पहले इसकी मांग शांति मार्च और रैलियों से शूरू होते हुए अब ये प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया है. वे सरकारी नौकरी और सरकारी कॉलेज में 16 फीसदी आरक्षण चाहते हैं. मराठा समुदाय के कुनबी और गैर कुलीन टिलर्स साल 1989 से ओबीसी कोटा में हैं, लेकिन मराठाओं का निशाना सरकरारी पदों पर भर्ती में अधिपत्य पर है. इसके साथ ही वह एससी-एसटी एक्ट में अमेंडमेंट चाहते हैं, जिससे दलित इसका दुरुपयोग न कर सकें.

मराठाओं की मांग और राजनीति
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने साल 2014 में उन्हें 16 फीसदी आरक्षण दे दिया था. लेकिन, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसपर रोक लगा दी थी. इसके बाद आई बीजेपी सरकार आरक्षण के लिए नया बिल लेकर आई. सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन केस अभी पेंडिंग है. इसके बाद सरकार ने एक पैनल बनाया जो कि समुदाय के सामाजिक-आर्थिक पिछड़े होने के सबूत पर काम कर रही है. इसका प्रपोजल राज्य पिछड़ा वर्ग कमीशन को भेजा जा चुका है.
18 में से 12 मुख्यमंत्री देने वाले मराठा एक बार फिर आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर

साल 2003-04 से है इसका असर
साल 2003-04 में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने मराठा समुदाय के आंदोलन को अन्य पिछड़ी जातियों में शामिल करने की मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद साल 2008 राज्य पिछड़ा आयोग ने कहा था, मराठा आर्थिक और राजनैतिक रूप से फॉरवर्ड हैं.

मराठाओं ने किन संकटों की तरफ किया इशारा
राज्य के किसान लंबे समय से जूझ रहे हैं. अनियमित मानसून और अनुचित फसल निर्धारण नीतियां किसानों के लिए लगातार चिंता का सबब रहे हैं. इसमें सिंचाई की कमी और लेबर चार्ज के साथ-साथ फर्टिलाइजर्स, खाद और बीज के भी संकट से किसान जूझ रहे हैं. इस बीच विदर्भ और मराठावाड़ा में किसानों के खुदकुशी के मामले सामने आने लगे. माराठा बच्चे शिक्षा में आरक्षण की मांग करने लगे.

सुप्रीम कोर्ट का क्या है आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कोई भी राज्य 50 प्रतिशत की सीमारेखा से बाहर जाकर आरक्षण नहीं दे सकता. जून 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने मराठों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण दिया था. इसके साथ ही सरकार ने मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था. राज्य में आरक्षण का दायरा बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया था. इसके बाद बॉम्बे कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी थी.

दिक्कत और समाधान के लिए सरकार का प्रयास
ओबीसी को पहले सी 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है. अगर सरकार ओबीसी में ही मराठों को आरक्षण देती है तो ओबीसी आंदोलन शुरू हो सकता है. ऐस में सरकार ने आरक्षण देने की बजाय पढ़ाई की फीस आधी करने, एजुकेशन लोन पर ब्याज दरें आधी करने और हॉस्टल सुविधाएं बढ़ाने का आश्वासन दिया है लेकिन यह मराठों को मंजूर नहीं है.

कौन कर रहा है आंदोलन का नेतृत्व
मराठाओं का नेतृत्व मुख्य तौर पर मराठा क्रांति मोर्चा, मराठा क्रांति समाज और सकल मराठा समाज जैसे संगठन कर रहे हैं. कई छोटे-छोटे मराठा ग्रुप ने भी इन्हें ज्वाइन कर लिया है. ऐसे में देखते ही देखते इनकी संख्या काफी ज्यादा हो गई है. इसमें मुख्य रूप से पुणे, सतारा, कोल्हापुर, सोलापुर, थाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, धुले, जलगांव, नाशिक, नंदुर्बार के लोग शामिल है.