नई दिल्ली. सिखों का सबसे पवित्र धर्मस्थल, अमृतसर का स्वर्ण मंदिर अब और चमकेगा. क्योंकि इसके मुख्य गुंबद के अलावा चार अन्य गुंबदों (ड्योढ़ी) पर करीब 50 करोड़ रुपए के 160 किलो सोने की परत चढ़ाई जाने वाली है. इसके बाद अकाल तख्त और हरमंदिर साहेब के नाम से प्रसिद्ध इस पवित्र स्थल की रौनक और बढ़ जाएगी. पंजाब के अमृतसर में सरोवर के बीच मौजूद हरमंदिर साहेब दुनियाभर में रहने वाले सिख समुदाय के मतावलंबियों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है. इस मंदिर की देखरेख का जिम्मा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पास है. SGPC के प्रवक्ता और अतिरिक्त सचिव दलजीत सिंह बेदी ने अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि कमेटी ने स्वर्ण मंदिर के सभी गुंबदों की सुंदरता और चमक को और बढ़ाने का निर्णय लिया है. यह संकेत है कि स्वर्ण मंदिर के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं.Also Read - पंजाब: ऑपरेशन ब्लूस्टार की 37वीं बरसी पर स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थक नारे लगाए गए

हर गुंबद पर 40 किलो सोने की परत
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के दिशा-निर्देशों के तहत कारसेवकों का एक दल अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के गुंबदों पर सोने की परत चढ़ाने के काम में लगा हुआ है. हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार लगभग 200 साल पहले बने इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर सोने की परत चढ़ाने का काम महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था. उन्होंने ‘सोने दी सेवा’ का आह्वान कर उस समय 16.39 लाख रुपए इसके लिए दिए थे. मुस्लिम कारीगर मोहम्मद खान ने इस ऐतिहासिक मंदिर की गुंबद पर सोने की परत चढ़ाने का काम किया था. SGPC के प्रवक्ता दलजीत सिंह बेदी ने अखबार को बताया, ‘हरमंदिर साहेब के चारों में से हर एक गुंबद पर 40 किलो सोने की परत चढ़ाई जानी है. बीते अप्रैल महीने से ही कार सेवक घंटाघर स्थित ड्योढ़ी पर सोने की परत चढ़ाने का काम कर रहे हैं. इसका काम पूरा होने के बाद बाकी गुंबदों पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी. Also Read - 'स्वर्ण मंदिर की खूबसूरती देखकर हैरान रह गईं Kangana Ranaut, बोलीं- निशब्द हूं

फोटो साभारः वीडियो ग्रैब DNA

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ऑपरेशन ब्लूस्टार से मंदिर को पहुंचा था नुकसान
वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान आतंकी गतिविधियों के कारण हरमंदिर साहेब को बहुत नुकसान पहुंचा था. इसको देखते हुए सिख संगठनों ने स्वर्ण मंदिर के पुनरुद्धार की योजना बनाई. गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था और ब्रिटेन स्थित गुरुद्वारा सोहो रोड ने इसका जिम्मा लिया. दोनों संगठनों ने एक बार फिर से स्वर्ण मंदिर की चमक लौटाने का काम करीब चार वर्षों में पूरा किया. वर्ष 1995 के फरवरी में शुरू हुआ यह काम अप्रैल 1999 में पूरा किया गया था. इसके बाद से लगातार हरमंदिर साहेब की रौनक बरकरार रखने के लिए सिख संगठन काम कर रहे हैं. Also Read - श्रद्धालुओं के लिए खोले गए 'गोल्डन टेंपल' के दरवाजे, लेकिन सख्त नियमों के साथ

संगतों के स्वर्ण दान से हो रहा काम
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के गुंबदों पर सोने की परत चढ़ाए जाने का काम यहां आने वाले श्रद्धालुओं, जिन्हें सिख धर्म में संगत कहा जाता है, के स्वर्ण दान से पूरा किया जा रहा है. मंदिर में कार सेवा से जुड़े बाबा कश्मीर सिंह भूरिवाले ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, ‘एक गुंबद को पूरी तरह से सोने से मढ़ने में करीबन 40 किलो सोना लगेगा. इसमें 10 किलो की बढ़ोतरी हो सकती है.’ उन्होंने बताया कि मंदिर के बीचो-बीच स्थित मुख्य गुंबद सबसे बड़ा है, जबकि अन्य गुंबद इससे छोटे हैं. इन सभी पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी. इसके लिए सारा सोना यहां आने वाले संगतों से दान में प्राप्त हुआ है. बाबा कश्मीर सिंह ने बताया, ‘स्वर्ण मंदिर सिखों के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. इसके बारे में गुरुवाणी में भी कहा गया है कि दुनिया में सारी जगह देखी, लेकिन इसके जैसी सुंदर और कोई जगह नहीं है. इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के लिए स्वेच्छा से स्वर्ण दान करते हैं. इसी सोने से गुंबदों को निखारा जा रहा है.’

फोटो साभारः वीडियो ग्रैब DNA

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जेवरों को पिघलाकर तैयार की जाती है सोने की परत
हरमंदिर साहेब के गुंबदों पर सोने की परत चढ़ाने के काम की देख-रेख कर रहे बलबीर सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु दान के रूप में अमूमन अपने जेवर अर्पित करते हैं. ये जेवर 22 कैरेट सोने के होते हैं. गुंबद पर चढ़ाई जाने वाली सोने की परत बनाने के लिए इन जेवरों को पिघलाकर और शुद्ध (24 कैरेट के होने तक) किया जाता है. शुद्ध सोने को पतले-पतले फ्वाइल के रूप में बदला जाता है. एक फ्वाइल करीब 15 ग्राम का होता है. एक के बाद एक 15 से 20 फ्वाइल्स को तांबे की शीट पर चस्पा किया जाता है. तांबे की शीट पर फ्वाइल्स के चस्पा होने के बाद इसे मरकरी, इमली और एसिड से साफ कर चमकीला बनाया जाता है. तब जाकर गुंबद पर लगाने लायक परत तैयार हो पाती है. हरमंदिर साहेब में चल रहे इस काम में कई शिल्पकार लगे हैं. एक कारीगर हरकमल कुमार ने अखबार को बताया कि 10 कारीगर और कई मजदूर इस काम में लगे हैं.