नई दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने घोषणा की थी कि वर्ष 2022 तक भारत अंतरिक्ष में मानव-सहित यान, ‘गगन यान’ (GaganYaan) भेजेगा. इस घोषणा के बाद इस कार्यक्रम को पूरा करने की कवायद तेज हो गई है. क्योंकि पिछले दिनों एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर के लिए जगह तय होने से इसके सकारात्मक संकेत मिले हैं. वर्ष 2008-09 से ही ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम (HSP) के तहत ट्रेनिंग सेंटर के लिए जमीन आवंटन की कवायद चल रही थी. अब जाकर यह पूरी हुई है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, बेंगलुरू शहर के बाहरी इलाके देवनहल्ली में इस ट्रेनिंग सेंटर के लिए जगह दी गई है, जो यहां के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर है. इस प्रशिक्षण केंद्र का नाम एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर होगा, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) विकसित करेगा. 40 से 50 एकड़ में विकसित किया जाने वाला यह प्रशिक्षण केंद्र बहुत कुछ रूस के कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर की तर्ज पर ही बनेगा, जहां दुनियाभर के अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग दी जाती है.

पहले अभियान की ट्रेनिंग रूस या अमेरिका में
हालांकि भारत के पहले मानव-सहित अंतरिक्ष यान अभियान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को रूस या अमेरिका में ही प्रशिक्षित किए जाने की योजना है. भारत के ट्रेनिंग सेंटर के पूरी तरह से विकसित होने के बाद ही यहां पर अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘देश के पहले मानव-सहित अंतरिक्ष यान मिशन के लिए अब बहुत ही कम समय बचा है, लिहाज अभी देवनहल्ली ट्रेनिंग सेंटर में किसी अंतरिक्ष यात्री को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता. इसलिए पहले मिशन के लिए विदेश में ही अंतरिक्ष पर जाने वाले यात्री को ट्रेनिंद दिलाया जाएगा. लेकिन भविष्य के लिए यह प्रशिक्षण केंद्र उपयोगी होगा.’ अखबार के अनुसार भारतीय वायुसेना के इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मेडिसिन (IAM) के सहयोग से विकसित किए जाने वाले इस ट्रेनिंग सेंटर को भविष्य में मानव-सहित अंतरिक्ष यान मिशन के लिए एस्ट्रोनॉट की ट्रेनिंग, रिकवरी मिशन और रेस्क्यू ऑपरेशन आदि के प्रशिक्षण-केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना है.

एस्ट्रोनॉट को जीरो ग्रैविटी में रहने का मिलेगा प्रशिक्षण
इसरो के प्रशिक्षण केंद्र को अत्याधुनिक बनाए जाने की योजना है. इस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित एस्ट्रोनॉट के जीरो ग्रैविटी में रहने की भी व्यवस्था होगी, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर ही अंतरिक्ष में रहने का माहौल मिले. इसके लिए सेंटर में जीरो ग्रैविटी फैसिलटी देने वाले उपकरण लगाए जाएंगे. यह इंतजाम दरअसल, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा द्वारा बताए गए अनुभवों के आधार पर किया जा रहा है. राकेश शर्मा ने वर्ष 1984 में सोवियत रूस के एक मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी. इसके अलावा इस प्रशिक्षण केंद्र में थर्मल साइक्लिंग और रेडिएशन रेगुलेशन चैंबर भी होंगे. इसरो से जुड़े एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को वाटर-सिम्युलेटर में ट्रेनिंग दी जाएगी. वाटर सिम्युलेटर, स्वीमिंग-पूल जैसा माहौल देता है. अंतरिक्ष यात्रियों को पानी के नीचे जाना होगा, जहां वे जीरो ग्रैविटी में रहने का प्रशिक्षण ले सकेंगे. एक अन्य अधिकारी ने अखबार को बताया कि देवनहल्ली ट्रेनिंग सेंटर को बिना किसी विदेशी मदद के तैयार करने की योजना है.