नई दिल्ली: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का आज 93 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. अटल जी के जाने के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ है, आम लोगों के साथ साथ खास लोग सभी शोक में डूबे हुए हैं. दोस्ती होना आसान है लेकिन उसे निभाना मुश्किल है. आम जीवन में भी कई बार ऐसे मौके आते हैं जब पुराने से पुराने दोस्तों में भी दरार आ जाती है तो फिर राजनीति में तो लंबी दोस्ती निभाना वाकई बड़ी बात है. भारतीय राजनीति में भी ऐसी एक जोड़ी है अटल-आडवाणी की जोड़ी. भारतीय राजनीति में अगर सबसे लंबे समय तक दोस्तों की कोई जोड़ी रही है तो वो अटल-आडवाणी हैं. Also Read - आने वाला कल न भुलाएं, आओ फिर से दीया जलाएं... PM मोदी की अपील में है अटल बिहारी वाजपेयी की इस कविता की झलक

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इन दोनों बड़े नेताओं का भारतीय राजनीति में प्रवेश लगभग आसपास ही हुआ था. इन दोनों की दोस्ती न सिर्फ दिलचस्प है बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी है. ये दोनों ही नेता जनसंघ की स्थापना के समय से साथ रहे हैं. दोनों नेताओं ने 1977 में भी जनता पार्टी की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था.

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आडवाणी को बनाया था गृह मंत्री

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर गठित हुए मंत्रिमंडल में आडवाणी ने गृह मंत्री की भूमिका निभाई थी. बाद में 2002 से 2004 के दौरान लालकृष्ण आडवाणी को देश का उपप्रधानमंत्री भी बनाया गया था. अटलजी के साथ अपनी दोस्ती को याद करते हुए आडवाणी ने एक इंटरव्यू में बताया था, ”अटलजी जब प्रधानमंत्री थे तब अगर कोई उनसे सरकार या पार्टी के बारे में कुछ बात करने आता था तो वो बोलते थे ”आडवाणी जी से बात हो गई? कर लो एक बार. ऐसी दोस्ती कहां देखने को मिलेगी.”

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दिल्ली की सड़कों पर खाते थे चाट

आडवाणी ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि जवानी के दिनों में दोनों नेता दिल्ली की सड़कों पर गोलगप्पे खाने जाया करते थे, उस समय आडवाणी स्कूटर चलाते थे और वाजपेयी जी पीछे बैठा करते थे. आडवाणी ने बताया था कि दिल्ली के रिवोली और रीगल सिनेमा हॉल के बीच में बैठे गोलगप्पे वालों के पास जाकर ये दोनों नेता चाट खाते थे.

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दोनों को था पढ़ने का शौक

दोनों नेताओं को पढ़ने लिखने का भी शौक था और किताबों को लेकर दोनों के बीच एक गहरा संबंध था. आडवाणी ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि दोनों को फिल्में देखने और किताबे पढ़ने का काफी शौक था. मई 2013 में आडवाणी ने बीजेपी की वेबसाइट पर एक ब्लॉग के जरिए वाजपेयी को भारत का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री बताया था.

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भारत रत्न देने की थी मांग

आडवाणी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने की भी मांग की थी. आडवाणी ने इस पत्र में मनमोहन सिंह सरकार के सामने 10 बिंदु भी रखे थे जिसमें उन्होंने बताया था कि वाजपेयी को भारत रत्न क्यों दिया जाना चाहिए. खैर उस समय तो यह नहीं हो पाया लेकिन 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न का अवॉर्ड दिया गया था. भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की ये दोस्ती हमेशा याद की जाएगी.