नई दिल्ली. कालजयी रचनाकार की परिभाषा की बात करें तो सामान्यतया हमारे दिमाग में किसी साहित्यकार या लेखक का चित्र कौंधता है. फिर हम उसका नाम याद करने लगते हैं. उसकी रचना की चर्चा होने लगती है. अपने देश में, जहां कि सैकड़ों भाषाओं और बोलियों में रचनाएं लिखी-पढ़ी जाती हैं, ऐसी कई रचनाएं हैं जो हमारी जबान पर रहती हैं. संस्कृत में कालिदास का ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ हो, हिन्दी में श्रीलाल शुक्ल का ‘राग दरबारी’, मराठी नाटककार विजय तेंदुलकर का नाटक ‘घासीराम कोतवाल’, बांग्ला में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की ‘गीतांजिल’ आदि-आदि. भाषाई विद्वानों की इसी श्रृंखला में अंग्रेजी के साहित्यकारों की लिस्ट में एक बड़ा नाम है, जिसे विभिन्न भाषाओं के लोग खूब अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं. इस साहित्यकार का न सिर्फ नाम जाना जाता है, बल्कि उनकी रचनाएं भी उसी तरह पसंद की जाती हैं. जी हां, अंग्रेजी के इस प्रसिद्ध साहित्यकार का नाम है आर. के. नारायण (R.K. Narayan). भारत में अंग्रेजी के कुछ गिने-चुने लेखकों में शुमार आर.के. नारायण का आज जन्मदिन है.Also Read - जूही चावला से लेकर देव आनंद तक, यहां देखिए बॉलीवुड की वो Throwback Pics जो अब तक थी UNSEEN

बॉलीवुड फिल्मों के शौकीन उनके नाम को मशहूर अभिनेता देव आनंद की फिल्म ‘गाइड’ से याद करते हैं, तो वहीं साहित्य जगत में उन्हें ‘गाइड’ (The Guide) और ‘मालगुडी डेज’ (Malgudi Days) जैसी अद्भुत और उत्कृष्ट रचनाओं के लिए याद किया जाता है. दक्षिण भारत के चेन्नई में 10 अक्टूबर 1906 को जन्मे रासीपुरम कृष्णस्वामी एय्यर नारायण स्वामी उर्फ आर.के. नारायण को ऐसे बड़े कहानीकार के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने कहा था कि कहानियां छोटी ही लिखी जानी चाहिए. ‘मालगुडी डेज’ की प्रस्तावना में नारायण ने लिखा भी है, ‘कहानी छोटी ही होनी चाहिए, इस पर दुनिया में सभी एकमत हैं, लेकिन उसकी परिभाषा अलग-अलग ढंगों से की जाती है- अखबार के रिपोर्टर की तरह सामान्य विवरण से लेकर साहित्यिक लेखक के गंभीर चित्रण-विश्लेषण तक, जिसमें घटना, चरित्र भाषा, अभिव्यक्ति, लेखक की अपनी विशेष शैली इत्यादि अनेक बातों पर पूरा ध्यान दिया जाता है. अपनी बात करूं तो मुझे व्यक्ति की परिस्थितियों पर उसके अपने ही चरित्र संकट में कहानी का सामग्री प्राप्त हो जाती है.’ Also Read - सुरैया ने समंदर में फेंक दी थी देव आनंद की सगाई की अंगूठी, फिर ताउम्र नहीं की किसी से शादी

Malgudi-Days Also Read - लंदन में छाया बॉलीवुड गानों का जादू, जनता की पसंद ने इस गीत को बनाया नंबर 1

दुनिया में कहीं भी मिल जाएगा मालगुडी गांव
मालगुडी डेज’ के बाजार में आने और इसके लोकप्रिय होने के बाद इस किताब के पाठकों के लिए सबसे बड़ा सवाल था कि मालगुडी गांव आखिर है कहां. इसका जवाब भी खुद आर.के. नारायण ने ही दिया है. इस किताब की प्रस्तावना में नारायण ने स्पष्ट कर दिया है कि मालगुडी वास्तविक नहीं, बल्कि काल्पनिक गांव है. दुनिया के किसी भी नक्शे पर इसे नहीं ढूंढा जा सकता. लेकिन इस गांव से मिलते-जुलते लक्षण आपको दुनिया में कहीं भी दिख जाएंगे. नारायण ने लिखा है, ‘अगर मैं कहूं कि मालगुडी दक्षिण भारत में एक कस्बा है तो यह भी अधूरी सच्चाई होगी, क्योंकि मालगुडी के लक्षण दुनिया में हर जगह मिल जाएंगे. मैं न्यूयार्क में भी मालगुडी के लक्षण ढूंढ लेता हूं- नगर के पश्चिमी भाग में तेईसवीं सड़क जहां 1959 के बाद मैं अक्सर कई-कई महीनों तक रहा, जहां बस्ती के निशान और लोगों की ज़िन्दगी में कभी कोई फेरबदल नहीं हुआ. सिनेगॉग की सीढ़ियों पर लुढ़कते शराबी, वह दुकान जिस पर हमेशा बड़े-बड़े शब्दों में लिखा रहता है: यहां की हर चीज़ हफ्ते भर में बिक जाती है. नाई की दुकान, डेन्टिस्ट, वकील, मछली पकड़ने वाले हुकों वगैरह का विशेष स्टोर और स्वादिष्ट खाने-पीने के रहने के रेस्तरां. मालगुडी एक कल्पना का कस्बा ही है, लेकिन यह मेरे उद्देश्यों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है.’