नई दिल्ली. अगले कुछ महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियां यूं तो हाल में हुए विधानसभा चुनाव को ‘सेमीफाइनल’ मानते हुए पहले ही शुरू हो चुकी हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) समेत विभिन्न राजनीतिक दल नए साल के आगाज के साथ अब इन तैयारियों को औपचारिक रूप देने लगे हैं. इसी क्रम में भाजपा ने जहां अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है, वहीं कांग्रेस अपनी टीम को डिजिटल तरीके से और ‘ट्रेंड’ करने में जुट गई है. अगले लोकसभा चुनावों में भाजपा के चुनावी प्रचार में न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के अन्य देशों से आए मेहमानों यानी पार्टी समर्थकों का हुजूम भी दिखेगा. इसके लिए पार्टी ने दुनिया के 25 से ज्यादा देशों में मौजूद अपने समर्थकों की टीम को भारत बुलाने की शुरुआत कर दी है. इधर, भाजपा के आक्रामक चुनावी प्रचार-शैली को देखते हुए कांग्रेस भी चुनाव अभियान की तैयारियों के तहत अपनी डिजिटल टीम को और ज्यादा सक्रिय करने में जुट गई है. कांग्रेस ने अपने डाटा एनालिसिस टीम को जमीनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूत आधार तैयार करने का काम सौंपा है, ताकि जब औपचारिक रूप से चुनाव प्रचार की शुरुआत हो तो पार्टी के नेताओं के पास ‘तथ्यों का भंडार’ रहे.

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भाजपा की तैयारी- अमेरिका और इंग्लैंड से आएंगे समर्थक
देश में सबसे ज्यादा कार्यकर्ताओं वाली पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा के विदेशी मामलों के प्रकोष्ठ ने लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए विदेश में कार्यरत समर्थकों को बुलाना शुरू कर दिया है. अंग्रेजी अखबार डीएनए के अनुसार, दुनिया के 25 देशों में भाजपा के समर्थक (Overseas Friends of BJP/OFBJP) हैं. अकेले अमेरिका में 5 हजार से ज्यादा और इंग्लैंड में 2 हजार से ज्यादा भाजपा के सदस्य हैं. इन दोनों देशों के अलावा यूरोप और अमेरिका के कई देशों में भी भाजपा के सदस्य सक्रिय हैं. पार्टी के विदेशी प्रकोष्ठ ने इन सभी सदस्यों, समर्थकों, उनके मित्रों और परिचितों को लोकसभा चुनाव के दौरान भारत आने को कहा है, ताकि इन्हें चुनाव प्रचार के काम में लगाया जा सके.

भाजपा विदेशी मामलों के प्रकोष्ठ के प्रमुख विजय चौथाईवाले ने डीएनए को बताया कि विदेश में मौजूद भारतीय समुदाय 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भी नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है. पीएम मोदी की लोकप्रियता और उनकी वैश्विक नेता की छवि से भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग खुश हैं. आगे भी हमने इन प्रवासियों की इच्छा को देखते हुए ही पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार अभियान के लिए भारत आने को कहा है.

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कांग्रेस की तैयारी- डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत करेगी पार्टी
तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में भी पूरे जोशो-खरोश के साथ उतरना चाहती है. इसीलिए जिस तरह भाजपा ने 2014 के आम चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के जरिए आक्रामक प्रचार अभियान चलाया था, उसे देखते हुए कांग्रेस अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म- शक्ति को सशक्त करने में जुटी है. हाल के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी प्लेटफॉर्म के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के नाम के संबंध में सुझाव मांगा था. कांग्रेस के देशभर में फैले 5 करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने अपने विचार इसी प्लेटफॉर्म पर राहुल गांधी से शेयर किए थे. इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस अगले लोकसभा चुनाव में भी अपने इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहती है.

डाटा एनालिटिक्स टीम के हेड पूर्व इंवेस्टमेंट बैंकर प्रवीण चक्रवर्ती ने डीएनए को बताया कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए न सिर्फ लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों का चयन आसानी से हो सकेगा, बल्कि यह पार्टी के आला नेताओं के लिए देशभर से इनपुट जुटाने का काम भी करेगी. इसके अलावा जल्द ही शक्ति-प्लेटफॉर्म पर देश के 10 लाख से ज्यादा बूथों को भी मैप किया जाएगा, जिस पर चुनाव क्षेत्र, विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की जानकारी, मतदान के आंकड़े, वोटरों से संबंधित सभी तरह की जानकारियां होंगी. पार्टी के एक नेता ने डीएनए को बताया कि शक्ति-प्लेटफॉर्म के जरिए कांग्रेस को जमीनी स्तर की वह सभी जानकारियां मिल सकेंगी, जिसकी जरूरत चुनाव प्रचार के दौरान होती है.