नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले (Nirbhaya Gangrape Murder Case) के चारों दोषियों को फांसी देने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने डेथ वारंट (Death Warrant in Nirbhaya Case) जारी कर दिया है. चारों दोषियों को 22 जनवरी 2020 को फांसी दी जाएगी. इससे पहले 18 दिसंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दोषी अक्षय सिंह की याचिका पर दलीलें सुनने के बाद फांसी की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था. इससे मामले के दोषी अक्षय सिंह सहित चारों दोषियों की फांसी की सजा का रास्ता साफ़ हो गया था. पटियाला हाउस कोर्ट में फांसी के दिन को तय करने के लिए डेथ वारंट जारी करना था, जो आज कोर्ट ने कर भी दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने ही चारों को दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. Also Read - Covid-19 In India: कोरोना से मचे कोहराम पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, केंद्र को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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पहले भी हो चुकी है एक साथ चार लोगों को फांसी
निर्भया केस के चारों गुनहगारों मुकेश, अक्षय सिंह, पवन और विनय को फांसी दी जाएगी. ये चारों इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं. ये पहला मौका नहीं है जब एक साथ चार लोगों को फांसी दी जायेगी. इससे पहले भी एक बार ऐसा हो चुका है. इससे पहले 27 नवंबर 1983 को जोशी अभयंकर मामले में एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई थी. जोशी अभयंकर मामला दस लोगों की हत्या से जुड़ा था. ये मामला इतना बड़ा था कि कोर्ट ने इस कृत्य के लिए चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. और चारों को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई थी. Also Read - No Lockdown In Lucknow And 4 Cities: यूपी में लॉकडाउन नहीं, हाइकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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रेप के मामले में एक साथ चार को फांसी देने का ये पहला मौका
पहले चार लोगों को फांसी तो दी जा चुकी है, लेकिन ये पहला मौका है जब रेप के मामले में एक साथ चार लोगों को फांसी दी जाएगी. ये फांसी चार साल पहले 2015 में दी गई थी. जबकि रेप के मामले में पिछली बार फांसी 2004 में दी गई थी. पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी.  धनंजय ने 14 साल की लड़की की रेप के बाद बेरहमी से हत्या की थी. इसके बाद धनंजय को फांसी की सजा सुनाई गई थी. ये मामला 14 साल चला था. धनंजय को फांसी कोलकाता की अलीपुर जेल में दी गई थी. धनंजय को सुबह चार बजे जल्लाद ने फांसी पर लटका दिया था. इस काम को कोलकाता के जल्लाद नाटा मलिक ने अंजाम दिया था.