नई दिल्ली/दिसपुर. असम में आए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजिटन (एनआरसी) की फाइनल ड्राफ्ट पर प्रतिक्रियाएं जारी हैं. कोई इसे जायज ठहरा रहा है तो किसी को इसे अप्लाई करने में गलती दिख रही है. वहीं, कई लोग इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि भारतीय और बाहरियों की पहचान हो रही है. लेकिन लिस्ट आने के बाद राज्य के लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल है. इसका कारण भी लिस्ट ही है. किसी परिवार के चार सदस्यों के नाम हैं तो दो के नहीं, भाई का नाम है तो बहन का या दूसरे भाई का नहीं. यहां तक कि किसी पति-पत्नी के नाम हैं तो उनके बच्चों के नाम नहीं हैं. आर्मी के जवान, सीआईएसएफ हेड कॉन्स्टेबल, गेजेटेड अफसर और यहां तक कि असम पुलिस में तैनात असिस्टेंट सब-इन्स्पेक्टर जो कि मुख्यमंत्री को सुरक्षा मुहैया कराने वाली टीम का हिस्सा रह चुका है, उसका नाम भी एनआरसी के ड्राफ्ट में नहीं है. पढ़ें 5 केस स्टडी…

सरकारी टीचर मोइनुल हक
47 साल के मोइनुल हक असम के उदलगुरी जिल के रहने वाले हैं और एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं. तीन साल पहले 55 हजार सरकारी कर्मचारियों और कॉन्ट्रेक्ट पर रखे कर्मचारियों को एनआरसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लगाया गया. इसमें मोइनुल भी शामिल थे. लेकिन, एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट के बाद उन्हें मालूम हुआ कि वह भी उन 40 लाख लोगों में शामिल हैं, जिनका नाम इस फाइनल ड्राफ्ट में नहीं रखा गया है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से उन्होंने कहा कि वह वास्तविक भारतीय हैं और उन्हें लगता है कि वह इसे साबित कर लेंगे.मोइनुल हक ने बताया कि उनका 11 लोगों का परिवार है. सभी का नाम एनआरसी से बाहर है. एनआरसी के काम में शामिल होने के कारण पिछले तीन साल में वह बहुत ही कम समय स्कूल में बिता पाए हैं. उनके एक भाई भी सरकारी स्कूल में टीचर हैं.

कारगिल शहीद का भतीजा
ग्रेनेडियर चिनमॉय भौमिक असम के बोरखोला चुनाव के रहने वाले हैं. साल 1999 कारगिल युद्द के दौरान वह शहीद हो गए थे. उनके 13 साल के भतीजे पिनाक का नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है. हालांकि, उनके माता पिता और पिरजनों का नाम इसमें शामिल है. पिनाक एक सरकारी स्कूल में 9वीं में पढ़ते हैं. इस परिवार के तीन लोगों ने भारतीय सेना में नौकरी की है.
Q&A: NRC को लेकर उठे 10 सवाल का जवाब, असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस क्यों है खास

नागरिक संरक्षण कमेटी के महासचिव का नाम
असम नागरिक संरक्षण कमेटी के महासचिव शेखर डे का भी नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है. उनके मुताबिक, उनके पास पिता का एनआरसी सर्टिफिकेट है, जो 1951 में बना था. वह यहीं पैदा और बड़े हुए. अब एनआरसी की रिपोर्ट में उनका नाम शामिल नहीं है. 66 साल की उम्र में वह नागरिकता के लिए अब संघर्ष कर रहे हैं.

सिपाही इनामुल
सिपाही इनामुल हक असम के बारपेटा जिले के माजगावं के रहने वाले हैं. वह उत्तराखंड के रूरकी में सेना सेवा कोर में तैनात हैं. उनका नाम भी एनआरसी के ड्राफ्ट में शामिल नहीं है. हालांकि, उनके परिवार के सदस्यों के नाम शामिल है. यह जानकारी उनके बड़े भाई ने दी है. इनामुल ने कहा, मैं एक सैनिक हूं, मैं कैसे भारतीय नागरिक नहीं हो सकता?

गजेटेड अफसर सदुल्लाह
48 साल के सदुल्लाह अहमद आईएएफ टेक्निशियन रह चुके हैं. वर्तमान में वह गुवाहाटी के अकाउंट जनरल (ऑडिट) ऑफिस में असिस्टेंट ऑडिट अफसर हैं. यह एक गजेटेड पोस्ट है. लेकिन उनका NRC के लिस्ट में शामिल नहीं है. इसके पीछे तर्क दिया गया है कि जिस विरासत डेटा के आधार पर उनकी बड़ी बहन को विदेशी करार दिया गया है, उन्होंने भी उसका प्रयोग किया है. सदुल्लाह के मुताबिक, उनके पिता मोबद अली का नाम 1951 के एनआरसी, 1958 और 1967 के जमीन रिकॉर्ड और 1971 के वोटर लिस्ट में शामिल है. उनकी बहन को बारपेट में साल 2012 में विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किया गया था. इस निर्णय पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है और सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है.